गुरु पूर्णिमा व्रत कथा: जानिए इस दिन की पवित्र कहानी और इसका महत्व

गुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म में गुरु के सम्मान का पर्व है। इस दिन शिष्य अपने गुरु के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हैं।

गुरु पूर्णिमा की पौराणिक कथा

मान्यता है कि इस दिन वेद व्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने महाभारत और पुराणों की रचना की।

श्री वेदव्यास जी की भूमिका

व्यास जी को 'आदि गुरु' कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने वेदों का विभाजन कर मानवता को ज्ञान मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाया।

गुरु पूर्णिमा व्रत की कथा

एक बार भगवान शिव ने सप्तर्षियों को ब्रह्मज्ञान दिया। उन्हीं सप्तर्षियों में से एक महर्षि व्यास बने, जिन्होंने ज्ञान को लिपिबद्ध किया।

शिष्य और गुरु का संबंध

गुरु पूर्णिमा की कथा हमें सिखाती है कि सच्चा शिष्य वही है जो विनम्रता से ज्ञान प्राप्त करे और गुरु को श्रद्धा अर्पित करे।

व्रत विधि क्या है?

इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और गुरु का पूजन कर व्रत रखें। व्रत में केवल फलाहार करें।

कैसे करें पूजन?

गुरु की तस्वीर या चरणों पर चंदन, फूल, फल, वस्त्र, और दक्षिणा अर्पित करें। 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु...' मंत्र का जाप करें।

इस दिन क्या करें?

– गुरु से आशीर्वाद लें – आध्यात्मिक ग्रंथ पढ़ें – किसी को ज्ञान का दान दें – किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराएँ

गुरु की कृपा से मिलती है दिशा

गुरु पूर्णिमा हमें याद दिलाती है कि जीवन में सच्चे गुरु की उपस्थिति हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।

जय गुरु देव!

इस गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को प्रणाम करें और जीवन में सच्चे ज्ञान की ओर अग्रसर हों।