Rukmini Ashtami 2025 – व्रत, पूजा विधि और महत्व

रुक्मिणी अष्टमी 2025 कब है?

रुक्मिणी अष्टमी 2025 का पर्व 12 दिसंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन माँ रुक्मिणी की पूजा-अर्चना करके सुख, समृद्धि और वैवाहिक आनंद की कामना की जाती है।

रुक्मिणी अष्टमी का महत्व

कृष्णप्रिय माँ रुक्मिणी त्याग, प्रेम और पतिव्रता की प्रतीक मानी जाती हैं। इस दिन किया गया व्रत वैवाहिक जीवन में प्रेम, सामंजस्य और सौभाग्य प्रदान करता है।

व्रत कैसे करें?

सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। भगवान कृष्ण और माँ रुक्मिणी का पूजन हल्दी, चावल, तुलसी, पीले फूल और घी दीपक से करें। दिनभर व्रत रखकर शाम में कथा पढ़ें।

रुक्मिणी अष्टमी पूजा सामग्री

पीले फूल, तुलसी पत्र, धूप, घी दीपक, पंचामृत, रुक्मिणी अष्टमी कथा पुस्तक, भगवान कृष्ण की मूर्ति, पीला प्रसाद (हलवा/चूरमा)।

रुक्मिणी अष्टमी की कथा (संक्षेप में)

माँ रुक्मिणी ने भगवान कृष्ण को पाने के लिए कठोर व्रत किया था। उनके समर्पण, विश्वास और प्रेम से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया और अंततः विवाह किया। इस कथा से प्रेम और भक्ति की शक्ति का संदेश मिलता है।

महिलाओं के लिए विशेष लाभ

रुक्मिणी अष्टमी का व्रत:  दांपत्य जीवन में मधुरता लाता है , मनोकामनाएँ पूर्ण करता है  मानसिक शांति और सौभाग्य प्राप्त होता है

क्या करें और क्या न करें?

करें: पीले वस्त्र पहनें, कृष्ण-रुक्मिणी मंत्र जपें, तुलसी अर्पित करें। न करें: कटु वचन, क्रोध, भोजन में तामसिक चीजें, घर में विवाद।

रुक्मिणी मंत्र जप

“ॐ रुक्मिण्यै नमः।” या “ॐ श्री कृष्णाय वासुदेवाय नमः।” 108 बार जप करने से मनोकामना सिद्ध होती है।

रुक्मिणी अष्टमी 2025 का व्रत प्रेम, समर्पण और सौभाग्य का प्रतीक है। इस दिन श्रद्धा से पूजा करें और परिवार के लिए मंगलकामनाएँ प्राप्त करें।