भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा कब निकलेगी? जानें तारीख, महत्व और तीनों दिव्य रथों का रहस्य।
इस साल (2026) जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई (गुरुवार) से शुरू होगी। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को निकलने वाली यह भव्य रथ यात्रा 9 दिनों तक चलती है
मान्यता है कि इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं।
– भगवान जगन्नाथ – नंदीघोष – भगवान बलभद्र – तालध्वज – देवी सुभद्रा – दर्पदलन हर रथ का अपना विशेष रंग, आकार और आध्यात्मिक महत्व होता है।
छेरा पहरा परंपरा रथ यात्रा से पहले पुरी के गजपति महाराज सोने की झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करते हैं। यह परंपरा बताती है कि भगवान के सामने सभी समान हैं।
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं, जहां वे कुछ दिनों तक विराजमान रहते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान के रथ की रस्सी खींचने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं।
रोचक तथ्य हर वर्ष तीनों रथ नए पवित्र लकड़ी से बनाए जाते हैं। रथ निर्माण की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
वापसी कब होती है? गुंडिचा मंदिर में प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा बहुदा यात्रा के माध्यम से वापस श्रीमंदिर लौटते हैं।
रथ यात्रा केवल एक उत्सव नहीं बल्कि श्रद्धा, सेवा, समानता और भगवान जगन्नाथ की कृपा का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर लाखों श्रद्धालु दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।