नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है, बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक पर्व है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था। आइए जानते हैं — इस पावन दिन की तिथि, कथा, पूजा विधि और महत्व।
तिथि आरंभ: 19 अक्टूबर 2025, दोपहर 1:51 बजे तिथि समाप्त: 20 अक्टूबर 2025, दोपहर 3:44 बजे अभ्यंग स्नान मुहूर्त: सुबह 5:13 से 6:25 बजे तक इस दिन स्नान, दीपदान और यमराज पूजा का विशेष महत्व है।
राक्षस नरकासुर ने धरती पर अत्याचार किए और 16,000 स्त्रियों को बंदी बनाया। भगवान श्रीकृष्ण और माता सत्यभामा ने उसका वध कर देवताओं और मानवों को मुक्त किया। उसी दिन से नरक चतुर्दशी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बन गई।
यह दिन आत्मशुद्धि और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक है। माना जाता है कि इस दिन अभ्यंग स्नान से पापों का नाश होता है। यह त्योहार दीपों के माध्यम से अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।
प्रातः काल तेल से अभ्यंग स्नान करें दीप जलाकर यमराज की पूजा करें घर की सफाई और दीपदान करें देवी-देवताओं की आराधना कर शुभकामनाएँ साझा करें यह पूजा जीवन से अंधकार को दूर कर आंतरिक प्रकाश लाती है।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें तिल या उबटन से शरीर की शुद्धि करें घर के दरवाज़े पर दीप रखें परिवार के साथ दीप जलाएँ और मिठाइयाँ बाँटें इस दिन “ओम नमो नारायणाय” का जप करना शुभ माना जाता है।
यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मिक परिवर्तन का प्रतीक है। अंधकार मिटाओ, प्रेम और करुणा फैलाओ। अपने भीतर के प्रकाश को जगाओ और नकारात्मकता को दूर करो।