गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति स्थापना करते समय मूर्ति का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। जानिए किस स्वरूप के गणपति को घर लाना शुभ माना जाता है।
गणपति स्थापना के लिए बैठी हुई गणेश जी की मूर्ति को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस स्वरूप में भगवान गणेश घर में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
घर में पूजा के लिए गणपति की बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्ति को सामान्यतः शुभ माना जाता है। इसे गृहस्थ जीवन के लिए सरल पूजा वाला स्वरूप माना जाता है।
गणपति की मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। स्थापना करते समय यह भी ध्यान रखें कि पूजा करने वाले व्यक्ति का मुख उचित दिशा की ओर रहे।
गणेश जी की मूर्ति प्रसन्न मुद्रा, सुंदर नेत्रों और आशीर्वाद देते हाथ वाली हो तो इसे शुभ माना जाता है। मूर्ति खंडित या टूटी हुई नहीं होनी चाहिए।
भगवान गणेश की मूर्ति के साथ मूषक और मोदक का होना शुभ माना जाता है। मूषक गणेश जी का वाहन है, जबकि मोदक ज्ञान और आनंद का प्रतीक माना जाता है।
गणपति स्थापना के लिए प्राकृतिक मिट्टी से बनी मूर्ति एक अच्छा विकल्प है। ऐसी मूर्ति पूजा के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देती है।
गणपति की मूर्ति का आकार बड़ा होना जरूरी नहीं है। घर में उपलब्ध स्थान और पूजा की सुविधा के अनुसार साफ-सुथरी और संतुलित आकार की मूर्ति चुनना बेहतर है।
घर की गणपति स्थापना के लिए खंडित, टूटी या क्षतिग्रस्त मूर्ति नहीं लानी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शांत और प्रसन्न स्वरूप की गणेश प्रतिमा पूजा के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
मूर्ति लाने से पहले पूजा का स्थान साफ करें। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं और गणपति स्थापना के लिए आवश्यक पूजा सामग्री तैयार रखें।
अगर आप घर में गणपति स्थापित कर रहे हैं, तो बैठी हुई, प्रसन्न मुद्रा वाली, बाईं सूंड और प्राकृतिक मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा एक सरल और शुभ विकल्प मानी जा सकती है।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा इसी विश्वास से जुड़ी है।
गणपति बप्पा मोरया! इस गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएं।