मार्गशीर्ष पूर्णिमा हर साल मार्गशीर्ष मास के अंतिम दिन आती है और यह अत्यंत शुभ मानी जाती है। यह दिन दान, ध्यान, पूजा और पितृ तर्पण के लिए अत्यंत फलदायी है।
तिथि 04 दिसंबर 2025 को 08:37 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन भोर में प्रात:काल 04:43 बजे समाप्त होगी. 04 दिसंबर 2025 का दिन ही उत्तम रहेगा
मार्गशीर्ष पूर्णिमा को: – विष्णु भगवान की पूजा विशेष फल देती है – सत्य, धर्म और भक्ति की वृद्धि होती है – पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है – ग्रह दोष शांत होते हैं
– ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करें – तुलसी, धूप, दीप के साथ भगवान विष्णु की पूजा – श्री सूक्त, विष्णु सहस्रनाम का पाठ – दान— अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, जल
– क्रोध, झूठ, विवाद से दूर रहें – नकारात्मक विचार और अपवित्र भोजन न करें – किसी का अपमान न करें
– मानसिक शांति – घर-परिवार में सौभाग्य – रुके हुए कार्यों में सफलता – पितरों की कृपा और मोक्ष का मार्ग
मार्गशीर्ष मास को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने श्रेष्ठ महीना बताया है। इस पूर्णिमा को की गई पूजा अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जाती है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा आध्यात्मिक उन्नति, दान और भक्ति का दिव्य अवसर है। एक दिन की साधना जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।