मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। यह दिन पापों से मुक्ति दिलाने वाला और मोक्ष का मार्ग खोलने वाला माना जाता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन व्रत करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति मोक्ष के पथ पर आगे बढ़ता है।
व्रत रखने वाला व्यक्ति प्रातःकाल स्नान कर संकल्प लेता है - “मैं मोक्षदा एकादशी का व्रत रखकर मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करना चाहता हूँ।”
एक समय की बात है, चंपक नगर में वैखानस नाम का राजा राज्य करता था। वह न्यायप्रिय और सत्यनिष्ठ था।
एक रात राजा ने स्वप्न में अपने पिता को नरक में कष्ट सहते देखा। पिता ने रोकर कहा - “मैं अपने पापों के कारण नरक में हूँ, मेरी मुक्ति का उपाय करो!”
दु:खी राजा ने ऋषियों की सहायता लेने का निश्चय किया और महर्षि पराशर के आश्रम पहुँचा।
ऋषि ने ध्यान लगाकर बताया “राजन्! आपके पिता पूर्व जन्म के एक पाप के कारण यहाँ कष्ट पा रहे हैं। उनकी मुक्ति के लिए मोक्षदा एकादशी का व्रत करें।”
राजा वैखानस ने नियमपूर्वक मोक्षदा एकादशी का व्रत किया और विधिपूर्वक भगवान विष्णु को अर्पण किया।
व्रत के प्रभाव से राजा के पिता नरक से मुक्त होकर स्वर्ग लोक में चला गए। राजा प्रसन्न और कृतज्ञ हो उठा।
जो व्यक्ति इस दिन व्रत करता है – पापों से मुक्त होता है , परिवार में शांति आती है , पूर्वजों की मुक्ति होती है , मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है
इस दिन- • उपवास • भगवान विष्णु का पूजन • गीता पाठ • दान-पुण्य सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
मोक्षदा एकादशी ऐसा व्रत है जो आत्मा को प्रकाश की ओर ले जाता है। जो श्रद्धा से इसे करता है उसे मोक्ष प्राप्ति का मार्ग अवश्य मिलता है।