सफला एकादशी को वर्ष की सबसे फलदायी एकादशी माना गया है। इस व्रत से भाग्य खुलता है और हर मनोकामना पूर्ण होती है।
15 दिसंबर 2025
प्राचीन समय में राजा महिष्मत का पुत्र लुंपक अत्यंत पापी था। वह चोरी, हिंसा और अधर्म में लिप्त रहने लगा।
राजा ने उसके दुष्कर्मों से दुखी होकर उसे राज्य से निकाल दिया। लुंपक जंगलों में भटकने लगा और उसका जीवन कष्टमय हो गया।
एक दिन भीषण ठंड में वह पेड़ के नीचे बेहोश हो गया। वह दिन सफला एकादशी का था। अज्ञानवश उपवास और जागरण होने से उसका मन शुद्ध हुआ।
अगली सुबह लुंपक ने विष्णु पूजा की। भगवान उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और कहा— “तुम्हारे उपवास से तुम्हारे सभी पाप नष्ट हो गए।”
लुंपक के जीवन में चमत्कार हुआ। वह अपने पिता के पास लौटा, राजा ने उसे गले लगा लिया। उसे राज्य का उत्तराधिकारी घोषित किया गया।
भगवान कहते हैं: “इस दिन किया गया व्रत – पापों का नाश, – दुर्भाग्य का अंत, – और सौभाग्य का उदय करता है।”
सफला एकादशी व्रत ऐसे करें: – प्रातः स्नान – तुलसी व दीपदान – विष्णु सहस्रनाम पाठ – फलाहार या निर्जल व्रत – रात्रि जागरण
इस व्रत से मिलता है: धन-संपत्ति मनोकामना सिद्धि नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति जीवन में सौभाग्य
सफला एकादशी वह व्रत है जो जीवन को सफल, शांत और समृद्ध बनाता है। 2025 में इसे पूरे श्रद्धा से करें और दिव्य फल प्राप्त करें।