अगर अच्छे रिश्ते बार-बार टूट जाते हैं या विवाह तय होकर भी नहीं हो पाता, तो इसके पीछे ज्योतिषीय कारण हो सकते हैं।
सप्तम भाव या सप्तमेश पर शनि का प्रभाव विवाह में विलंब करा सकता है। हालांकि शनि देर से लेकिन स्थायी और जिम्मेदार जीवनसाथी देने वाला ग्रह माना जाता है।
कुंडली में मंगल दोष होने पर विवाह में बाधाएं, रिश्तों में तनाव या शादी में देरी देखने को मिल सकती है। सही मिलान के बाद इसका प्रभाव कम हो सकता है।
पुरुष की कुंडली में शुक्र और महिला की कुंडली में गुरु कमजोर होने पर विवाह में देरी या अच्छे रिश्तों में रुकावट आ सकती है।
यदि राहु या केतु विवाह भाव या विवाह कारक ग्रहों को प्रभावित करें, तो बार-बार रिश्ते टूटना या निर्णय में भ्रम जैसी स्थिति बन सकती है।
– भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। – शुक्रवार को माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह की उपासना करें। – योग्य ज्योतिषी से कुंडली का सही विश्लेषण करवाएं। – विवाह से जुड़े मंत्रों का नियमित जाप करें।
कई बार शादी में देरी इसलिए होती है ताकि सही समय पर सही जीवनसाथी मिले। धैर्य, सकारात्मक सोच और सही प्रयास हमेशा शुभ परिणाम देते हैं।
ज्योतिष केवल संभावनाएं बताता है, भाग्य के साथ आपके कर्म और सही निर्णय भी सफल वैवाहिक जीवन की कुंजी हैं।
ऐसी ही ज्योतिष, धर्म और राशिफल से जुड़ी रोचक जानकारी के लिए हमें फॉलो करें।