शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन श्रीहरि विष्णु की शक्ति ‘एकादशी देवी’ का प्रादुर्भाव हुआ था। यह व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला और मन को शुद्ध करने वाला माना गया है।
एक बार असुर ‘मुर’ देवताओं को पराजित कर स्वर्गलोक पर अधिकार कर लेता है। तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास सहायता के लिए जाते हैं।
भगवान विष्णु मुरासुर से 10,000 वर्षों तक युद्ध करते रहे। जब वे विश्राम करने गए, तो मुरासुर ने उन पर आक्रमण करने का प्रयास किया।
उसी क्षण भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य कन्या उत्पन्न हुई। उसने मुरासुर का संहार कर दिया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर कहा — “तुम मेरे शरीर से उत्पन्न हुई हो, इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा।”
भगवान विष्णु ने कहा — “जो व्यक्ति एकादशी का व्रत रखेगा, वह सभी पापों से मुक्त होकर मेरे धाम को प्राप्त करेगा।” इस प्रकार यह व्रत मोक्षदायी और सर्वपापहर है।
सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें। पीले वस्त्र, तुलसीदल और दीप अर्पित करें। दिनभर उपवास रखें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
द्वादशी तिथि को ब्राह्मण या गरीब व्यक्ति को भोजन कराकर व्रत का पारण करें। फलाहार से उपवास तोड़ें और भगवान का आशीर्वाद लें।
सभी पापों से मुक्ति आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति विष्णु लोक की प्राप्ति जीवन में सुख, समृद्धि और संतोष
उत्पन्ना एकादशी न केवल व्रत का दिन है, बल्कि यह आत्मा को शुद्ध करने और ईश्वर से एकत्व पाने का अवसर भी है। जो श्रद्धा से इसका पालन करता है, वह निश्चित ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करता है।