चार महीने शयन के बाद इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर से जागते हैं. यही से शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है.
आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयन होता है कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी इन 4 महीनों को “चातुर्मास” कहा जाता है.
इस दिवस के बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि शुभ कार्य फिर से प्रारंभ होते हैं
सुबह पवित्र स्नान व्रत, तुलसी और शालिग्राम पूजा चार पत्तों का तुलसी-दल अर्पित करना शुभ
यह दिन धन, सुख और सौभाग्य बढ़ाने वाला माना गया है. शास्त्रों में इसे मोक्षदायक कहा गया है.
भगवान को डोला, दीप और शंख ध्वनि से जगाया जाता है. लोककथाओं में इस दिन तुलसी विवाह भी होता है.
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की तिथि की शुरुआत 01 नवंबर को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन 02 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर होगा।
प्याज-लहसुन रहित भोजन एक समय फलाहार पूरे दिन भगवान का स्मरण
व्रत रखने से घर में शांति कर्म सिद्धि भगवान विष्णु की विशेष कृपा
देवउठनी एकादशी आत्मिक जागरण का भी प्रतीक है ईश्वर के मार्ग पर चलने का संकल्प लें