
Navratri Day 3 Katha 2026
नवरात्रि का तीसरा दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। हिंदू धर्म में मां चंद्रघंटा को साहस, शक्ति, शांति और पराक्रम की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा अपने भक्तों के भय और कष्टों को दूर करती हैं तथा उन्हें जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा करने, मंत्रों का जाप करने और व्रत कथा का पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत दिव्य और तेजस्वी है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी सुशोभित होती है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का वाहन सिंह है, जो शक्ति, साहस और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। उनके हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित होते हैं, जो बुराई के विरुद्ध संघर्ष और धर्म की रक्षा का संदेश देते हैं।
मान्यता है कि नवरात्रि के तीसरे दिन सच्चे मन से मां चंद्रघंटा की आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यदि आप भी नवरात्रि में मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के साथ उनकी व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।
Navratri 2025 Day 3: कब है नवरात्रि का तीसरा दिन?
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक पूजा की जाती है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। वर्ष 2025 में शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन 24 सितंबर 2025 को था।
वहीं, वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन 13 अक्टूबर 2026 को पड़ रहा है। इस दिन भक्त मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना करके उनसे सुख, शांति, समृद्धि और साहस का आशीर्वाद मांग सकते हैं।
ध्यान दें कि नवरात्रि की तिथियां हिंदू पंचांग के अनुसार निर्धारित होती हैं। पूजा का शुभ समय अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित रहता है।
मां चंद्रघंटा कौन हैं? जानें उनके स्वरूप का धार्मिक महत्व
मां चंद्रघंटा मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरा स्वरूप हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन उनकी पूजा की जाती है। धार्मिक परंपरा में उन्हें शक्ति, पराक्रम और निर्भयता का प्रतीक माना गया है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप भक्तों को यह संदेश देता है कि जीवन में शांति और साहस दोनों का महत्व है। केवल शांत रहना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अन्याय और बुराई का सामना करने का साहस भी होना चाहिए।
मां के मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी उनके नाम का आधार मानी जाती है। उनका सिंह पर विराजमान होना निर्भयता और शक्ति का प्रतीक है। उनके हाथों में सुशोभित अस्त्र-शस्त्र धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश का संदेश देते हैं।
मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की उपासना करने से भक्तों के मन से भय दूर होता है और उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है। इस दिन भक्त मां के समक्ष दीपक जलाकर, फूल अर्पित करके और मंत्रों का जाप करके अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
मां चंद्रघंटा की व्रत कथा: महिषासुर के आतंक का अंत
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में महिषासुर नामक एक शक्तिशाली असुर ने तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था। वह अत्यंत बलशाली था और अपनी शक्ति के अहंकार में चूर होकर देवताओं तथा अन्य प्राणियों को परेशान करने लगा था।
महिषासुर की महत्वाकांक्षा केवल अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं थी। वह स्वर्गलोक पर अधिकार जमाकर वहां अपना शासन स्थापित करना चाहता था। इसी उद्देश्य से उसने देवताओं के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया।
महिषासुर की ओर से असुरों की विशाल सेना युद्धभूमि में उतरी, जबकि देवताओं ने देवराज इंद्र के नेतृत्व में उसका सामना किया। दोनों पक्षों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। हालांकि, महिषासुर की विशाल शक्ति के सामने देवताओं को पराजय का सामना करना पड़ा।
युद्ध में हारने के बाद देवराज इंद्र और दूसरे देवताओं को स्वर्गलोक से अपना अधिकार खोना पड़ा। महिषासुर ने स्वर्ग पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया। इससे तीनों लोकों में भय और अशांति का वातावरण बन गया।
देवता पहुंचे ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पास
महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता सहायता मांगने के लिए ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। उन्होंने अपनी परेशानी बताई और महिषासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने का उपाय पूछा।
ब्रह्मा जी ने देवताओं को भगवान विष्णु के पास जाने की सलाह दी। इसके बाद सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे और उन्हें महिषासुर के अत्याचारों तथा स्वर्गलोक पर उसके अधिकार के बारे में बताया।
भगवान विष्णु ने देवताओं की बात सुनी और इस समस्या के समाधान के लिए भगवान शिव के पास जाने का सुझाव दिया। इसके बाद सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे।
महिषासुर के अत्याचारों का वर्णन सुनकर भगवान शिव, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी सहित सभी देवता अत्यंत क्रोधित हुए। उनके दिव्य तेज से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई। यह शक्ति मां दुर्गा का दिव्य स्वरूप थी, जिन्हें मां चंद्रघंटा के रूप में भी पूजा जाता है।
मां चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप प्रकट हुआ
देवताओं के तेज से प्रकट हुई देवी अत्यंत तेजस्वी और दिव्य थीं। उनका स्वरूप इतना प्रभावशाली था कि उनके दर्शन मात्र से देवताओं के मन में आशा और उत्साह का संचार हुआ।
देवताओं ने मां को प्रणाम किया और उनसे महिषासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। इसके बाद भगवान शिव, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी सहित अन्य देवताओं ने देवी को विभिन्न अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए।
देवी को दिव्य आयुधों से सुसज्जित किया गया, ताकि वह महिषासुर और उसकी असुर सेना का सामना कर सकें। उनका तेज, पराक्रम और सिंह पर विराजमान स्वरूप अधर्म के विनाश का प्रतीक बन गया।
देवी के प्रकट होने से तीनों लोकों में आशा की नई किरण जाग उठी। देवताओं को विश्वास हो गया कि अब महिषासुर के अत्याचारों का अंत होगा और धर्म की पुनः स्थापना होगी।
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मां चंद्रघंटा और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध
देवी ने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा। अपनी शक्ति के अहंकार में डूबा महिषासुर देवी की चुनौती स्वीकार कर युद्धभूमि में उतर आया।
इसके बाद देवी और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध शुरू हुआ। दोनों पक्षों की शक्तियों का जोरदार संघर्ष हुआ। महिषासुर ने अपनी पूरी शक्ति से देवी को पराजित करने का प्रयास किया, लेकिन देवी के पराक्रम के सामने उसकी एक न चली।
मां चंद्रघंटा ने साहस और दिव्य शक्ति के साथ महिषासुर का सामना किया। अंततः देवी ने महिषासुर का वध कर दिया और तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया।
महिषासुर के अंत के साथ ही देवताओं को उनका खोया हुआ सम्मान और स्वर्गलोक पुनः प्राप्त हुआ। सभी देवताओं ने देवी की स्तुति की और उनका आभार व्यक्त किया।
इस प्रकार मां की शक्ति से अधर्म का अंत हुआ और धर्म की विजय का संदेश पूरे संसार में फैल गया।
धार्मिक मान्यता: मां चंद्रघंटा की यह कथा भक्तों को सिखाती है कि साहस, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। नवरात्रि के तीसरे दिन इस कथा का पाठ श्रद्धापूर्वक करना देवी की आराधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भक्त इस दिन मां से भय, नकारात्मक विचारों और जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति मांगते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से निम्नलिखित आध्यात्मिक लाभों की कामना की जाती है:
- भय से मुक्ति: मां की उपासना भक्तों को निर्भय बनने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा देती है।
- मानसिक शांति: पूजा, मंत्र जाप और ध्यान से मन को एकाग्र करने में सहायता मिल सकती है।
- आत्मविश्वास में वृद्धि: मां का पराक्रमी स्वरूप साहस और आत्मबल का संदेश देता है।
- नकारात्मकता से संघर्ष: देवी की आराधना भक्तों को सकारात्मक सोच और अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करती है।
- परिवार की सुख-समृद्धि: भक्त मां से अपने परिवार की खुशहाली और मंगल की प्रार्थना करते हैं।
- धर्म की रक्षा का संदेश: मां की कथा सिखाती है कि अन्याय के सामने चुप रहने के बजाय उचित और धर्मसम्मत तरीके से उसका सामना करना चाहिए।
इन लाभों को धार्मिक आस्था और परंपराओं के संदर्भ में समझना चाहिए। पूजा को किसी विशेष सांसारिक इच्छा की निश्चित पूर्ति की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा श्रद्धा और स्वच्छता के साथ करनी चाहिए। घर में पूजा करते समय निम्नलिखित विधि अपना सकते हैं।
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
ब्रह्म मुहूर्त या अपनी सुविधानुसार सुबह जल्दी उठें। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें।
2. मां दुर्गा और मां चंद्रघंटा का स्मरण करें
पूजा स्थल पर मां दुर्गा या मां चंद्रघंटा की तस्वीर अथवा प्रतिमा स्थापित करें। हाथ जोड़कर देवी का ध्यान करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
3. दीपक और धूप जलाएं
मां के समक्ष घी या तेल का दीपक जलाएं। धूप या अगरबत्ती अर्पित करें। पूजा करते समय मन को शांत रखें और देवी का स्मरण करें।
4. मां को फूल और अक्षत अर्पित करें
मां चंद्रघंटा को अपनी श्रद्धा के अनुसार फूल, अक्षत, चंदन और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। लाल या पीले फूलों का उपयोग कई पूजा परंपराओं में किया जाता है।
5. मंत्रों का जाप करें
मां चंद्रघंटा के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। आप अपनी सुविधानुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं।
6. व्रत कथा का पाठ करें
पूजा के दौरान मां चंद्रघंटा की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। कथा पढ़ते समय उसका आध्यात्मिक संदेश समझने का प्रयास करें।
7. आरती करके पूजा पूरी करें
अंत में मां चंद्रघंटा की आरती करें और सभी के कल्याण, स्वास्थ्य, सुख तथा शांति की प्रार्थना करें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार प्रसाद ग्रहण करें।
मां चंद्रघंटा का मंत्र
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के मंत्रों का जाप विशेष रूप से किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और पूजा परंपरा के अनुसार मंत्रों का पाठ कर सकते हैं।
मां चंद्रघंटा का बीज मंत्र:
ॐ ऐं श्रीं शक्तयै नमः।
मां चंद्रघंटा का ध्यान मंत्र:
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
इस ध्यान मंत्र में मां चंद्रघंटा के दिव्य और पराक्रमी स्वरूप का स्मरण किया जाता है। मंत्रों का उच्चारण श्रद्धा, एकाग्रता और शुद्ध भाव से करना चाहिए।
मां चंद्रघंटा को कौन-सा भोग लगाएं?
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को भोग अर्पित करने की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भोग की सामग्री में अंतर हो सकता है।
मां को श्रद्धानुसार निम्नलिखित चीजें अर्पित की जा सकती हैं:
- दूध से बनी मिठाइयां
- खीर
- फल
- मिश्री
- शुद्ध और सात्विक मिठाई
भोग बनाते समय स्वच्छता का ध्यान रखें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सामग्री चुनें। देवी की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, पवित्र भाव और अच्छे कर्मों का संकल्प है।
मां चंद्रघंटा को प्रिय रंग कौन-सा है?
नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। कई क्षेत्रीय परंपराओं में तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए लाल, पीले या सुनहरे रंग के वस्त्रों का उपयोग किया जाता है।
हालांकि, नवरात्रि के नौ दिनों के रंगों की सूची अलग-अलग पंचांगों और क्षेत्रीय परंपराओं में भिन्न हो सकती है। इसलिए किसी एक रंग को सभी परंपराओं में अनिवार्य मानना उचित नहीं है।
भक्त पूजा के समय स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण कर सकते हैं। मां की आराधना में रंग से अधिक महत्व श्रद्धा और मन की पवित्रता का है।
मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
नवरात्रि के तीसरे दिन पूजा करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- पूजा स्थल और आसपास की जगह को साफ रखें।
- पूजा सामग्री अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार एकत्रित करें।
- मां के समक्ष शांत मन से मंत्र जाप और प्रार्थना करें।
- व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा के अनुसार उपवास करें।
- पूजा के दौरान किसी के प्रति द्वेष, क्रोध या अपमान का भाव न रखें।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करें और दूसरों के प्रति दयालु व्यवहार अपनाएं।
- कथा और मंत्रों का पाठ करते समय उनके अर्थ तथा आध्यात्मिक संदेश को समझने का प्रयास करें।
नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि आत्मसंयम, सेवा, सद्भाव और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का अवसर भी है।
मां चंद्रघंटा की कथा से मिलने वाली सीख
मां चंद्रघंटा की कथा केवल महिषासुर के वध का वर्णन नहीं करती, बल्कि जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश भी देती है।
पहली सीख: अहंकार का अंत निश्चित है। महिषासुर अपनी शक्ति के अहंकार में इतना डूब गया था कि उसने दूसरों के अधिकारों और शांति का सम्मान नहीं किया। यह कथा बताती है कि शक्ति का उपयोग दूसरों को दबाने के लिए नहीं, बल्कि उनकी रक्षा के लिए करना चाहिए।
दूसरी सीख: साहस से कठिनाइयों का सामना करें। देवी ने महिषासुर की विशाल शक्ति से भयभीत हुए बिना उसका सामना किया। इसी तरह जीवन में समस्याएं आने पर धैर्य और विवेक बनाए रखना जरूरी है।
तीसरी सीख: एकता में शक्ति है। महिषासुर के आतंक से मुक्ति पाने के लिए देवताओं ने एक साथ प्रयास किया। इससे यह संदेश मिलता है कि कठिन परिस्थितियों में सहयोग और एकता महत्वपूर्ण होते हैं।
चौथी सीख: शांति और शक्ति का संतुलन जरूरी है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप बताता है कि व्यक्ति को विनम्र और शांत रहते हुए भी अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस रखना चाहिए।
पांचवीं सीख: धर्म और सदाचार का मार्ग अपनाएं। देवी की विजय सत्य और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। अपने दैनिक जीवन में ईमानदारी, दया और जिम्मेदारी का पालन करना भी देवी के संदेश को अपनाने का एक तरीका है।
मां चंद्रघंटा की कृपा पाने के लिए करें ये आध्यात्मिक संकल्प
नवरात्रि के तीसरे दिन पूजा के साथ कुछ अच्छे संकल्प लेना भी उपयोगी हो सकता है।
- प्रतिदिन कुछ समय ध्यान और प्रार्थना के लिए निकालें।
- क्रोध आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय धैर्य से काम लें।
- जरूरतमंद व्यक्ति की यथासंभव सहायता करें।
- परिवार के सदस्यों के साथ सम्मान और प्रेम से व्यवहार करें।
- कठिन परिस्थितियों में साहस और विवेक बनाए रखें।
- अपनी गलतियों को स्वीकार करके उनमें सुधार करने का प्रयास करें।
इन संकल्पों के माध्यम से मां चंद्रघंटा की कथा के आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में उतारा जा सकता है।
नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मां का दिव्य स्वरूप साहस, शक्ति, आत्मविश्वास और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। महिषासुर के आतंक और उसके अंत की कथा हमें सिखाती है कि अहंकार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य, साहस और धर्म के सामने टिक नहीं सकता।
इस दिन भक्त मां चंद्रघंटा की पूजा करके, मंत्रों का जाप करके और व्रत कथा का पाठ करके देवी से सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से की गई आराधना भक्तों को आध्यात्मिक संबल प्रदान करती है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा से प्रार्थना करें कि वे सभी को साहस, सद्बुद्धि, करुणा और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करें।
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