Bhagavad Gita

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 23

गीता के अनुसार स्थायी सुख पाने का सही तरीका क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 23 तं विद्याद्दुःखसंयोगवियोगं योगसंज्ञितम् । स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा ।।२३।। जिसमें दुखों के संयोग का […]

गीता के अनुसार स्थायी सुख पाने का सही तरीका क्या है? Read Post »

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 22

परम सुख कैसे पाएं? गीता का रहस्य जो हर दुःख में रखे अडिग

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 22 यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः । यस्मिन्स्थितो न दुःखेन गुरुणापि विचाल्यते ॥२२॥

परम सुख कैसे पाएं? गीता का रहस्य जो हर दुःख में रखे अडिग Read Post »

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 21

Bhagavad Gita के अनुसार असली सुख क्या है? जानिए क्यों ध्यान योगी कभी विचलित नहीं होता

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 21 सुखमात्यन्तिकं यत्तद्बुद्धिग्राह्यमतीन्द्रियम् । वेत्ति यत्र न चैवायं स्थितश्चलति तत्त्वतः ॥२१॥ जो सुख आत्यंतिक, अन्ततेंद्रिय

Bhagavad Gita के अनुसार असली सुख क्या है? जानिए क्यों ध्यान योगी कभी विचलित नहीं होता Read Post »

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 20

गीता का ध्यान योग: भीतर की खुशी कैसे मिले?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 20 यत्रोपरमते यत्र चित्तं निरुद्धं योगसेवया । चैवात्मनात्मानं पश्यन्नात्मनि तुष्यति ॥२०॥ योग करने से इंसान

गीता का ध्यान योग: भीतर की खुशी कैसे मिले? Read Post »

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 19

गीता में दीपक की लौ का उदाहरण क्या सिखाता है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 19 यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता । योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः ॥१९॥ जैसे स्थिर

गीता में दीपक की लौ का उदाहरण क्या सिखाता है? Read Post »

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 18

कब कहा जाता है कि साधक वास्तव में योगी बन गया?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 18 यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते ।निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा ॥१८॥ जब शांत मन अपने स्वरूप

कब कहा जाता है कि साधक वास्तव में योगी बन गया? Read Post »

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 17

भगवद्गीता के अनुसार संतुलित जीवन से दुःख कैसे मिटते हैं?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 17 युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु । युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥१७॥ दुखों को नष्ट करने वाला

भगवद्गीता के अनुसार संतुलित जीवन से दुःख कैसे मिटते हैं? Read Post »

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 16

भगवद्गीता के अनुसार योग के लिए संतुलित जीवन क्यों ज़रूरी है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 16 नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः । न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन ॥१६॥ हे अर्जुन!

भगवद्गीता के अनुसार योग के लिए संतुलित जीवन क्यों ज़रूरी है? Read Post »

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 15

परम शांति और सामान्य शांति में क्या अंतर है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 15 युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी नियतमानसः ।शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति ॥१५॥ नियत मन वाला योगी मन को

परम शांति और सामान्य शांति में क्या अंतर है? Read Post »

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 14

ध्यान योग में ब्रह्मचर्य व्रत इतना आवश्यक क्यों है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 14 प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः । मनः संयम्य मच्चितो युक्त आसीत मत्परः ॥१४॥ अर्थात जो सचेत

ध्यान योग में ब्रह्मचर्य व्रत इतना आवश्यक क्यों है? Read Post »

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 13

ध्यान में नाक के अग्रभाग पर दृष्टि रखने का क्या अर्थ है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 13 समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः । सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥१३॥ शरीर, सिर और गर्दन

ध्यान में नाक के अग्रभाग पर दृष्टि रखने का क्या अर्थ है? Read Post »

Scroll to Top