
Navratri 2026
Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना को समर्पित यह पर्व भक्तों के लिए आध्यात्मिक साधना, आत्मशुद्धि और शक्ति उपासना का विशेष अवसर माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और प्रत्येक देवी का अपना विशेष स्वरूप, मंत्र, भोग और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है।
नवरात्रि में जहां पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इन नौ शक्तियों की श्रद्धापूर्वक आराधना करने से जीवन में शक्ति, ज्ञान, साहस, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अगर आप भी Navratri 2026 में 9 दिनों तक मां दुर्गा की विधिवत पूजा करना चाहते हैं तो जानिए किस दिन किस देवी की पूजा करनी चाहिए, मां को कौन सा भोग लगाना शुभ माना जाता है और किस मंत्र का जाप करना चाहिए।
Navratri 2026 में 9 दिनों तक किस देवी की पूजा करें?
नवरात्रि के नौ दिनों को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों से जोड़ा गया है। इन नौ स्वरूपों को सामूहिक रूप से नवदुर्गा कहा जाता है।
| नवरात्रि का दिन | देवी का स्वरूप | विशेष महत्व |
| पहला दिन | मां शैलपुत्री | शक्ति और स्थिरता |
| दूसरा दिन | मां ब्रह्मचारिणी | तप, धैर्य और संयम |
| तीसरा दिन | मां चंद्रघंटा | साहस और शांति |
| चौथा दिन | मां कूष्मांडा | ऊर्जा और आरोग्य |
| पांचवां दिन | मां स्कंदमाता | मातृत्व और संतान सुख |
| छठा दिन | मां कात्यायनी | विजय और साहस |
| सातवां दिन | मां कालरात्रि | भय और नकारात्मकता से मुक्ति |
| आठवां दिन | मां महागौरी | शांति और पवित्रता |
| नौवां दिन | मां सिद्धिदात्री | सिद्धि और आध्यात्मिक पूर्णता |
अब जानते हैं इन नौ दिनों की पूजा का विस्तृत महत्व।
पहला दिन: मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। ‘शैल’ का अर्थ पर्वत और ‘पुत्री’ का अर्थ बेटी होता है। इसलिए मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री कहा जाता है।
मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ यानी बैल माना गया है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल सुशोभित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा भक्तों को जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और शक्ति प्रदान करने वाली मानी जाती है।
मां शैलपुत्री को क्या भोग लगाएं?
मां शैलपुत्री को परंपरागत रूप से घी का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार फल, मिठाई और अन्य सात्विक प्रसाद भी चढ़ा सकते हैं।
मां शैलपुत्री का मंत्र
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।
मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करते हुए मां के चरणों में अपनी मनोकामना रखें।
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और त्याग का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनके इसी तपस्विनी स्वरूप को ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल रहता है। उनका स्वरूप भक्तों को धैर्य, संयम, तप और दृढ़ संकल्प का संदेश देता है।
आज के जीवन में जब व्यक्ति थोड़ी सी परेशानी में अपना धैर्य खो देता है, तब मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप हमें सिखाता है कि बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास और संयम जरूरी है।
मां ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएं?
मां को चीनी, मिश्री और पंचामृत अर्पित करना शुभ माना जाता है। फल और सात्विक प्रसाद भी चढ़ाया जा सकता है।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
मां का ध्यान करते हुए मन को शांत रखें और अपने जीवन में धैर्य एवं सकारात्मकता की प्रार्थना करें।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य माना जाता है। उनके स्वरूप में एक ओर ममता और करुणा दिखाई देती है तो दूसरी ओर दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाला पराक्रम भी दिखाई देता है।
मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्त के अंदर साहस, आत्मविश्वास और निडरता बढ़ती है।
मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाएं?
मां को दूध, दूध से बनी मिठाइयां और खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
मां चंद्रघंटा का मंत्र
ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।
पूजा के समय मां का ध्यान करते हुए भय और नकारात्मक विचारों से मुक्ति की प्रार्थना करें।
चौथा दिन: मां कूष्मांडा की पूजा
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता में मां कूष्मांडा को सृष्टि में ऊर्जा और प्रकाश का संचार करने वाली शक्ति माना गया है।
‘कूष्मांडा’ नाम को ब्रह्मांडीय सृजन और ऊर्जा से जोड़ा जाता है। मां का तेजस्वी स्वरूप भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक माना जाता है।
मां कूष्मांडा की पूजा विशेष रूप से आरोग्य, ऊर्जा, समृद्धि और सकारात्मकता की कामना से की जाती है।
मां कूष्मांडा को क्या भोग लगाएं?
मां को मालपुआ, पेठा या कद्दू से बने सात्विक प्रसाद का भोग लगाने की परंपराएं विभिन्न क्षेत्रों में मिलती हैं। अपनी स्थानीय परंपरा के अनुसार भोग अर्पित किया जा सकता है।
मां कूष्मांडा का मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः।
मां के सामने दीपक जलाकर अपने घर में सुख, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्रार्थना करें।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता की पूजा
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंद भगवान कार्तिकेय का एक नाम है। भगवान स्कंद की माता होने के कारण देवी को स्कंदमाता कहा जाता है।
मां स्कंदमाता का स्वरूप मातृत्व, करुणा और प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि मां की पूजा करने से भक्तों को संतान सुख, पारिवारिक शांति और मातृ कृपा प्राप्त होती है।
मां का स्वरूप हमें यह भी याद दिलाता है कि शक्ति केवल युद्ध और विजय का नाम नहीं है, बल्कि प्रेम, करुणा और संरक्षण भी शक्ति के ही रूप हैं।
मां स्कंदमाता को क्या भोग लगाएं?
मां को केला और केले से बने प्रसाद का भोग लगाना शुभ माना जाता है। पंचामृत और अन्य सात्विक प्रसाद भी चढ़ाया जा सकता है।
मां स्कंदमाता का मंत्र
ॐ देवी स्कन्दमात्रै नमः।
मां से अपने परिवार की सुख-शांति और सभी सदस्यों के कल्याण की प्रार्थना करें।
छठा दिन: मां कात्यायनी की पूजा
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मां कात्यायनी को देवी दुर्गा का शक्तिशाली और योद्धा स्वरूप माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा।
मां कात्यायनी को विशेष रूप से शक्ति, साहस, विजय और मनोकामना पूर्ति से जोड़ा जाता है।
विवाह योग्य कन्याओं द्वारा मां कात्यायनी की पूजा किए जाने की परंपरा भी प्रसिद्ध है। श्रीमद्भागवत में वर्णित गोपियों की कात्यायनी पूजा की कथा इस परंपरा से जोड़ी जाती है।
मां कात्यायनी को क्या भोग लगाएं?
मां को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा फल और सात्विक मिठाई भी अर्पित की जा सकती है।
मां कात्यायनी का मंत्र
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
मां से जीवन में सही निर्णय लेने की शक्ति और सभी बाधाओं पर विजय पाने का आशीर्वाद मांगें।
सातवां दिन: मां कालरात्रि की पूजा
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। नाम भले ही उग्र हो, लेकिन भक्तों के लिए मां कालरात्रि अत्यंत कल्याणकारी मानी जाती हैं।
मां का स्वरूप अज्ञान, भय और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय से मुक्त करती हैं और उन्हें साहस प्रदान करती हैं।
नवरात्रि के सातवें दिन मां की पूजा करते समय मन में नकारात्मक विचारों, भय और बुरी आदतों को छोड़ने का संकल्प लेना विशेष रूप से अर्थपूर्ण माना जा सकता है।
मां कालरात्रि को क्या भोग लगाएं?
मां को गुड़ और गुड़ से बने प्रसाद का भोग लगाने की परंपरा है। क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अन्य सात्विक प्रसाद भी चढ़ाया जा सकता है।
मां कालरात्रि का मंत्र
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।
मां से भय, नकारात्मकता और जीवन की बाधाओं से रक्षा करने की प्रार्थना करें।
आठवां दिन: मां महागौरी की पूजा
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां महागौरी का स्वरूप शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक कथाओं में मां के तप और उसके बाद प्राप्त गौर वर्ण से महागौरी स्वरूप की कथा जुड़ी है।
मां महागौरी की पूजा भक्तों को आंतरिक शांति, पवित्रता, सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन की ओर प्रेरित करती है।
नवरात्रि की अष्टमी को कई घरों में कन्या पूजन भी किया जाता है। छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान और पूजन किया जाता है।
मां महागौरी को क्या भोग लगाएं?
मां को नारियल, हलवा, पूरी और चने का भोग लगाने की परंपरा है। कन्या पूजन में भी हलवा-पूरी और चने का प्रसाद विशेष रूप से बनाया जाता है।
मां महागौरी का मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः।
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री की पूजा
नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ‘सिद्धि’ का अर्थ आध्यात्मिक उपलब्धि या विशेष शक्ति और ‘दात्री’ का अर्थ प्रदान करने वाली है।
मां सिद्धिदात्री को नवदुर्गा का अंतिम स्वरूप माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में उन्हें विभिन्न प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है।
मां सिद्धिदात्री की पूजा नवरात्रि की साधना की पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है।
मां सिद्धिदात्री को क्या भोग लगाएं?
मां को तिल, फल, हलवा और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित किया जा सकता है। भोग अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार रखें।
मां सिद्धिदात्री का मंत्र
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।
मां से आध्यात्मिक ज्ञान, विवेक और सही मार्ग पर चलने की शक्ति मांगें।
मां के सामने दीपक जलाकर घर और परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना करें।
नवरात्रि के 9 दिनों की पूजा कैसे करें?
अगर आप घर पर नवरात्रि की पूजा कर रहे हैं तो रोजाना कुछ सामान्य नियमों का पालन कर सकते हैं।
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान की साफ-सफाई करें और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।
इसके बाद मां के सामने जल, अक्षत, फूल, रोली, सिंदूर, फल और नैवेद्य अर्पित करें। जिस दिन जिस नवदुर्गा का स्वरूप निर्धारित है, उस देवी का ध्यान करें और उनका मंत्र जाप करें।
इसके बाद दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र या दुर्गा चालीसा का पाठ अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार कर सकते हैं।
अंत में मां की आरती करें और परिवार के सुख-शांति की प्रार्थना करें।
नवरात्रि में अखंड ज्योत का क्या महत्व है?
नवरात्रि के दौरान कई भक्त घर में अखंड ज्योत जलाते हैं। धार्मिक दृष्टि से दीपक को ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
अखंड ज्योत जलाने की परंपरा का उद्देश्य मां की निरंतर उपस्थिति और भक्ति का प्रतीकात्मक स्मरण भी माना जाता है।
हालांकि दीपक जलाते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसे ऐसी जगह रखें जहां आग लगने का खतरा न हो और दीपक को सुरक्षित तरीके से जलाएं।
नवरात्रि में कलश स्थापना का महत्व
नवरात्रि की शुरुआत में कलश स्थापना या घटस्थापना की जाती है। कलश को शुभता, समृद्धि और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा भी कई परिवारों में होती है। नवरात्रि के दौरान जौ का बढ़ना शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है।
कलश स्थापना की विधि और शुभ मुहूर्त के लिए अपने क्षेत्र की पंचांग परंपरा का पालन करना उचित रहता है, क्योंकि तिथि और मुहूर्त स्थान के अनुसार बदल सकते हैं।
नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा का आध्यात्मिक संदेश
नवरात्रि केवल नौ दिनों तक देवी की पूजा करने का पर्व नहीं है। यह व्यक्ति के भीतर मौजूद नौ प्रकार की आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत करने का प्रतीक भी माना जा सकता है।
मां शैलपुत्री हमें स्थिरता सिखाती हैं।
मां ब्रह्मचारिणी धैर्य और तपस्या का संदेश देती हैं।
मां चंद्रघंटा साहस और संतुलन की प्रेरणा देती हैं।
मां कूष्मांडा जीवन में ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक हैं।
मां स्कंदमाता प्रेम और मातृत्व का संदेश देती हैं।
मां कात्यायनी अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस देती हैं।
मां कालरात्रि भय और नकारात्मकता का सामना करना सिखाती हैं।
मां महागौरी मन की शुद्धता और शांति का प्रतीक हैं।
मां सिद्धिदात्री आध्यात्मिक पूर्णता और ज्ञान की ओर संकेत करती हैं।
इस तरह नवरात्रि के नौ दिन केवल बाहरी पूजा नहीं बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि की यात्रा भी बन सकते हैं।
नवरात्रि में क्या सावधानियां रखें?
नवरात्रि के दौरान पूजा करते समय अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं का सम्मान करें। भोजन और व्रत के नियम सभी लोगों के लिए एक जैसे नहीं होते, इसलिए अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें।
पूजा में स्वच्छता का ध्यान रखें। मां को अर्पित किए जाने वाले फल और प्रसाद शुद्ध एवं सात्विक रखें।
यदि अखंड ज्योत जलाते हैं तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और सोते या घर से बाहर जाते समय आग की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा में दिखावे के बजाय श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक भाव को महत्व दें।
नवरात्रि 2026 में 9 दिनों की पूजा का आसान चार्ट
अगर आप नवरात्रि के दौरान रोजाना पूजा की तैयारी पहले से करना चाहते हैं, तो यह आसान चार्ट आपके लिए उपयोगी हो सकता है:
दिन 1 – मां शैलपुत्री: घी का भोग और शक्ति की प्रार्थना।
दिन 2 – मां ब्रह्मचारिणी: मिश्री/चीनी का भोग और धैर्य की प्रार्थना।
दिन 3 – मां चंद्रघंटा: दूध या खीर का भोग और साहस की प्रार्थना।
दिन 4 – मां कूष्मांडा: मालपुआ/पेठा जैसे सात्विक प्रसाद और ऊर्जा की प्रार्थना।
दिन 5 – मां स्कंदमाता: केले का भोग और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना।
दिन 6 – मां कात्यायनी: शहद का भोग और विजय की प्रार्थना।
दिन 7 – मां कालरात्रि: गुड़ का भोग और भय से मुक्ति की प्रार्थना।
दिन 8 – मां महागौरी: नारियल/हलवा-पूरी-चने का भोग और शांति की प्रार्थना।
दिन 9 – मां सिद्धिदात्री: तिल एवं सात्विक प्रसाद और ज्ञान-सिद्धि की प्रार्थना।
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नवरात्रि में कन्या पूजन क्यों किया जाता है?
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी को कई परिवारों में कन्या पूजन की परंपरा है। छोटी कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में सम्मान देकर भोजन कराया जाता है।
इसके पीछे यह भाव है कि स्त्री शक्ति स्वयं देवी का स्वरूप है। कन्या पूजन के माध्यम से समाज में बालिकाओं के सम्मान और नारी शक्ति के महत्व को भी स्मरण किया जाता है।
कन्या पूजन में भोजन कराने के साथ उन्हें सम्मानपूर्वक दक्षिणा या उपहार देना भी कई परिवारों की परंपरा है।
नवरात्रि 2026: घर में पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि के दौरान घर का पूजा स्थान साफ रखें।
सुबह और शाम मां के सामने दीपक जलाएं।
नियमित रूप से मां के मंत्र का जाप करें।
व्रत रखते हैं तो अपनी क्षमता के अनुसार सात्विक भोजन करें।
पूजा में क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करें।
जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें।
नवरात्रि के दौरान किसी भी जीव को अनावश्यक कष्ट न पहुंचाने और सभी के प्रति करुणा रखने का संकल्प लें।
क्योंकि देवी की पूजा का वास्तविक अर्थ केवल मंदिर में पूजा करना नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में भी दया, सत्य, संयम और सकारात्मकता लाना है।
नवरात्रि 2026 का सबसे बड़ा संदेश
नवरात्रि हमें यह संदेश देती है कि शक्ति हमारे बाहर ही नहीं, बल्कि हमारे भीतर भी मौजूद है।
जब जीवन में मुश्किलें आती हैं तो मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें अलग-अलग गुणों की याद दिलाते हैं। कभी हमें शैलपुत्री की तरह स्थिर रहना पड़ता है, कभी ब्रह्मचारिणी की तरह धैर्य रखना पड़ता है, कभी चंद्रघंटा की तरह साहस दिखाना पड़ता है और कभी कालरात्रि की तरह अपने डर का सामना करना पड़ता है।
इसीलिए नवरात्रि को केवल त्योहार की तरह मनाने के बजाय इसे आत्मशक्ति और आत्मचिंतन के नौ दिनों के रूप में मनाना भी बेहद सार्थक हो सकता है।
नौ दिनों तक मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हुए यदि हम अपने भीतर एक अच्छी आदत विकसित करने, एक बुरी आदत छोड़ने और किसी जरूरतमंद की मदद करने का संकल्प लें, तो यही नवरात्रि की भक्ति को जीवन में उतारने का सुंदर तरीका बन सकता है।
Navratri 2026 मां दुर्गा की आराधना और नवदुर्गा के नौ स्वरूपों को स्मरण करने का पावन अवसर है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री से लेकर नौवें दिन मां सिद्धिदात्री तक प्रत्येक देवी का स्वरूप अपने भीतर एक विशेष आध्यात्मिक संदेश समेटे हुए है।
इन नौ दिनों में विधि-विधान से पूजा करने के साथ यदि भक्त अपने जीवन में धैर्य, साहस, संयम, करुणा, सकारात्मकता और सत्य को अपनाने का प्रयास करे, तो नवरात्रि की साधना और भी सार्थक हो सकती है।
मां दुर्गा की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे। जय माता दी।
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