Navratri Day 7 2026

Navratri Day 7 2026

शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित होता है। नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना करने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। देवी का स्वरूप भले ही अत्यंत उग्र और भयावह दिखाई देता हो, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत कल्याणकारी मानी जाती हैं। इसी कारण मां कालरात्रि को शुभंकरी नाम से भी जाना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय, नकारात्मकता और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं। उनकी उपासना से साहस, आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता प्राप्त करने की कामना की जाती है। नवरात्रि के सातवें दिन भक्त विधि-विधान से देवी की पूजा करते हैं, उन्हें गुड़ का भोग लगाते हैं और मंत्रों का जाप करके परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से पहले उनके स्वरूप, पूजा विधि, प्रिय भोग, शुभ रंग, मंत्र, आरती और पौराणिक कथा के बारे में जानना उपयोगी रहेगा।

नवरात्रि का सातवां दिन 2026 कब है?

शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक दिन देवी के एक स्वरूप की आराधना करने की परंपरा है। सप्तमी के दिन मां कालरात्रि की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है।

इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान करके पूजा स्थल को स्वच्छ करते हैं। इसके बाद देवी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पुष्प, अक्षत, रोली, धूप और नैवेद्य अर्पित करते हैं। पूजा के दौरान मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप और उनकी आरती की जाती है।

ध्यान दें: सप्तमी तिथि का सटीक प्रारंभ, समाप्ति और पूजा का शुभ मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए पूजा का निश्चित समय जानने के लिए अपने शहर के पंचांग का संदर्भ लें।

मां कालरात्रि कौन हैं? जानें उनके स्वरूप का महत्व

मां कालरात्रि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सातवां स्वरूप हैं। देवी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है—‘काल’ और ‘रात्रि’। धार्मिक व्याख्याओं में काल को समय, मृत्यु और विनाश से जोड़ा जाता है, जबकि रात्रि अंधकार का प्रतीक है। इस प्रकार मां कालरात्रि का स्वरूप अंधकार, भय और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है।

देवी का रंग घने अंधकार के समान काला बताया गया है। उनके बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत के समान चमकने वाली माला सुशोभित रहती है। मां के तीन नेत्र हैं और उनके निःश्वास से अग्नि की ज्वालाएं निकलने का वर्णन मिलता है। उनका वाहन गर्दभ यानी गधा है।

मां कालरात्रि के चार हाथ बताए जाते हैं। उनके दो हाथों में अस्त्र होते हैं, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वर मुद्रा में रहते हैं। अभय मुद्रा भक्तों को भय से मुक्ति और सुरक्षा का संदेश देती है, वहीं वर मुद्रा कृपा और शुभ फल प्रदान करने का प्रतीक है।

देवी के इस उग्र रूप का उद्देश्य अधर्म और आसुरी शक्तियों का नाश करना है। इसलिए उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, साहस, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर उसका सामना किया जा सकता है।

मां कालरात्रि को शुभंकरी क्यों कहा जाता है?

मां कालरात्रि का रूप उग्र होने के बावजूद भक्तों के लिए मंगलकारी माना जाता है। इसी कारण उन्हें शुभंकरी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी अपने भक्तों के भय को दूर करने, कठिन परिस्थितियों में साहस देने और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा देती हैं।

मां कालरात्रि की पूजा का आध्यात्मिक संदेश यह है कि मनुष्य को अपने भीतर के भय, क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों का सामना करना चाहिए। सच्ची श्रद्धा के साथ देवी का स्मरण करने से व्यक्ति को आत्मबल और कठिनाइयों से जूझने की प्रेरणा मिलती है।

मां कालरात्रि पूजा विधि 2026: सप्तमी के दिन ऐसे करें पूजा

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा श्रद्धा, स्वच्छता और एकाग्रता के साथ करनी चाहिए। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण भाव भक्त की आस्था और देवी के प्रति समर्पण का होता है।

1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें

सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मां कालरात्रि की पूजा का संकल्प लें। संकल्प लेते समय अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य, सद्बुद्धि और कल्याण की प्रार्थना कर सकते हैं।

2. पूजा स्थल को शुद्ध करें

घर के मंदिर या पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद गंगाजल या स्वच्छ जल का छिड़काव करें। मां कालरात्रि की तस्वीर या प्रतिमा को साफ स्थान पर स्थापित करें। देवी के सामने दीपक जलाएं।

3. मां कालरात्रि का ध्यान करें

हाथ जोड़कर मां कालरात्रि का ध्यान करें और उनसे अपने मन से भय, नकारात्मक विचार तथा निराशा दूर करने की प्रार्थना करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और देवी के कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण करें।

4. रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें

मां को रोली, कुमकुम, अक्षत और अपनी श्रद्धा के अनुसार फूल अर्पित करें। परंपरा के अनुसार चमेली के फूल भी चढ़ाए जा सकते हैं। इसके बाद धूप और दीप दिखाकर देवी की आराधना करें।

5. मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें

पूजा के दौरान मां कालरात्रि के सरल मंत्र ‘ॐ कालरात्र्यै नमः’ का जाप करें। आप अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं। मंत्र जाप करते समय उच्चारण स्पष्ट रखें और मन को एकाग्र बनाए रखें।

6. गुड़ का भोग लगाएं

मां कालरात्रि को गुड़ का भोग अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। आप देवी को गुड़, गुड़ से बनी मिठाई या अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित कर सकते हैं। भोग लगाने के बाद कुछ समय देवी का ध्यान करें।

7. मां कालरात्रि की आरती करें

पूजा के अंत में मां कालरात्रि की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य एक साथ देवी की स्तुति कर सकते हैं। अंत में हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि, सद्बुद्धि, साहस और परिवार की मंगलकामना करें। इसके बाद प्रसाद वितरित करें।

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मां कालरात्रि की पूजा सामग्री

सप्तमी की पूजा से पहले आवश्यक सामग्री एकत्र कर लेने से पूजा आसानी से संपन्न की जा सकती है।

  • मां कालरात्रि की तस्वीर या प्रतिमा
  • पूजा की चौकी और स्वच्छ वस्त्र
  • रोली, कुमकुम और अक्षत
  • गंगाजल या स्वच्छ जल
  • लाल या अन्य उपलब्ध पुष्प
  • चमेली के फूल, यदि उपलब्ध हों
  • धूप, दीपक, रुई और घी या तेल
  • गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई
  • फल और अन्य सात्विक प्रसाद
  • आरती की थाली और घंटी

पूजा सामग्री में कोई वस्तु उपलब्ध न हो तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।

मां कालरात्रि का प्रिय भोग क्या है?

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में गुड़ को देवी के प्रिय नैवेद्य के रूप में बताया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार गुड़ या उससे बनी मिठाइयां अर्पित करते हैं।

मां कालरात्रि को निम्नलिखित भोग चढ़ाए जा सकते हैं:

गुड़: देवी को गुड़ अर्पित करना एक प्रचलित परंपरा है। इसे पूजा की थाली में रखकर श्रद्धापूर्वक भोग लगाया जा सकता है।

गुड़ का हलवा: घर पर तैयार किया गया सात्विक गुड़ का हलवा प्रसाद के रूप में अर्पित किया जा सकता है।

गुड़ की खीर: कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार गुड़ से बनी खीर भी प्रसाद में शामिल करते हैं।

मालपुआ या अन्य मिठाई: यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में प्रचलित हो, तो गुड़ से बनी मिठाई भी अर्पित की जा सकती है।

भोग बनाते समय स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखें। देवी को भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में बांटें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाने से भक्त देवी की कृपा, जीवन में सुख-शांति और बाधाओं से लड़ने की शक्ति की प्रार्थना करते हैं। यह धार्मिक आस्था का विषय है; भोग का वास्तविक महत्व श्रद्धा, समर्पण और प्रसाद साझा करने की भावना में भी निहित है।

नवरात्रि के सातवें दिन का शुभ रंग 2026

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा में नीले रंग के वस्त्र धारण करने की परंपरा कई जगह प्रचलित है। गहरा नीला रंग गंभीरता, स्थिरता और आत्मबल का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन नीले रंग के वस्त्र पहनकर देवी की आराधना कर सकते हैं।

हालांकि, नवरात्रि के प्रत्येक दिन के रंगों की सूची अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रीय मान्यताओं में भिन्न हो सकती है। इसलिए नीले रंग को सर्वमान्य शास्त्रीय नियम मानने के बजाय प्रचलित धार्मिक परंपरा के रूप में समझना उचित है।

यदि आपके पास नीले रंग के वस्त्र उपलब्ध नहीं हैं, तो किसी अन्य स्वच्छ वस्त्र में भी श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकते हैं। देवी की उपासना में रंग से अधिक महत्व भक्ति, सद्भाव और पवित्र भाव का माना जाता है।

मां कालरात्रि की पूजा में कौन-से फूल चढ़ाएं?

मां कालरात्रि की पूजा में चमेली के फूल अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार अन्य सुगंधित और ताजे फूल भी चढ़ा सकते हैं।

पूजा के समय फूल अर्पित करते हुए देवी से साहस, विवेक और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देने की प्रार्थना करें। फूल चढ़ाते समय यह ध्यान रखें कि वे स्वच्छ और ताजे हों।

यदि किसी विशेष फूल को लेकर आपके परिवार या स्थानीय मंदिर में कोई अलग परंपरा है, तो उसका पालन कर सकते हैं।

मां कालरात्रि की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब असुरों का अत्याचार बढ़ने लगा, तब देवताओं और संसार की रक्षा के लिए देवी शक्ति ने उग्र स्वरूप धारण किया। मां कालरात्रि की कथा का संबंध विशेष रूप से रक्तबीज नामक असुर के वध से जोड़ा जाता है।

रक्तबीज के आतंक से परेशान हुए देवता

पौराणिक कथा के अनुसार, रक्तबीज नामक असुर को एक विशेष वरदान प्राप्त था। उसके शरीर से निकलने वाले रक्त की प्रत्येक बूंद जब धरती पर गिरती थी, तो उससे उसके समान एक नया असुर उत्पन्न हो जाता था। इस वरदान के कारण युद्ध में उसे पराजित करना अत्यंत कठिन हो गया।

जब देवी और असुरों के बीच भयंकर युद्ध हुआ, तब रक्तबीज के शरीर से गिरने वाले रक्त के कारण अनेक नए असुर पैदा होने लगे। जितना अधिक उस पर प्रहार किया जाता, उतनी ही अधिक उसकी सेना बढ़ती जाती। इससे देवताओं की चिंता बढ़ गई।

मां दुर्गा ने धारण किया उग्र स्वरूप

रक्तबीज का संहार करने के लिए देवी ने अपना उग्र रूप प्रकट किया। इस स्वरूप को मां कालरात्रि से संबंधित परंपराओं में अत्यंत शक्तिशाली और विनाशकारी बताया जाता है। देवी का उद्देश्य रक्तबीज की उस शक्ति को समाप्त करना था, जिसके कारण उसका वध असंभव दिखाई दे रहा था।

कथा के अनुसार, देवी ने रक्तबीज के रक्त को धरती पर गिरने से रोकने का उपाय किया। उन्होंने उसके रक्त को भूमि पर गिरने से पहले ही ग्रहण कर लिया, जिससे नए असुर उत्पन्न होने का क्रम रुक गया। अंततः रक्तबीज का संहार हुआ और देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति मिली।

मां कालरात्रि ने दिया धर्म की रक्षा का संदेश

रक्तबीज के वध की कथा देवी की शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक मानी जाती है। यह कथा बताती है कि जब बुराई बार-बार सिर उठाती है, तब उसका सामना करने के लिए केवल बल ही नहीं, बल्कि उचित रणनीति, धैर्य और विवेक की भी आवश्यकता होती है।

नवरात्रि के सातवें दिन भक्त मां कालरात्रि की पूजा करके अपने जीवन से भय, निराशा और नकारात्मकता दूर करने की प्रार्थना करते हैं। देवी का स्मरण हमें यह प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियों में घबराने के बजाय धैर्य और साहस से काम लेना चाहिए।

धार्मिक संदर्भ: मां कालरात्रि का वर्णन देवी दुर्गा के नवदुर्गा स्वरूपों की परंपरा में मिलता है। रक्तबीज के वध की विस्तृत कथा देवी महात्म्य, जिसे दुर्गा सप्तशती भी कहा जाता है, के देवी-माहात्म्य प्रसंगों से संबंधित है। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में कथा के विवरण और देवी के स्वरूप के वर्णन में कुछ अंतर मिल सकता है।

मां कालरात्रि के शक्तिशाली मंत्र

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करना भक्तिपूर्ण उपासना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंत्र जाप से मन को एकाग्र करने, आत्मबल बढ़ाने और देवी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की प्रेरणा मिलती है।

1. मां कालरात्रि का सरल मंत्र

मंत्र:

ॐ कालरात्र्यै नमः॥

यह मां कालरात्रि का सरल और प्रचलित मंत्र है। पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप श्रद्धापूर्वक करें।

2. मां कालरात्रि का बीज मंत्र

मंत्र:

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः॥

इस मंत्र का जाप भक्त देवी शक्ति का स्मरण करते हुए करते हैं। यदि आप बीज मंत्र का जाप करते हैं, तो अपने परिवार की परंपरा या गुरु के मार्गदर्शन का पालन कर सकते हैं।

3. मां कालरात्रि का देवी मंत्र

मंत्र:

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

यह मंत्र मां कालरात्रि को नमन करने और उनकी कृपा की प्रार्थना करने के लिए बोला जाता है।

4. मां कालरात्रि का स्तुति मंत्र

मंत्र:

या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

इस स्तुति के माध्यम से देवी के कालरात्रि स्वरूप को नमन किया जाता है। मंत्र का पाठ करते समय उसके भाव और अर्थ पर ध्यान देना भी उपयोगी है।

मंत्र जाप करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  • पूजा से पहले हाथ-मुंह धोकर या स्नान करके स्वच्छ स्थान पर बैठें।
  • मन को शांत रखकर मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करें।
  • अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार मंत्र का जाप करें।
  • मंत्र जाप को किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने या भय उत्पन्न करने का माध्यम न बनाएं।
  • पूजा के अंत में देवी से सद्बुद्धि, साहस और कल्याण की प्रार्थना करें।

मां कालरात्रि की आरती

नवरात्रि के सातवें दिन पूजा के अंत में मां कालरात्रि की आरती की जाती है। नीचे प्रचलित आरती का एक पाठ दिया गया है। अलग-अलग पुस्तकों और क्षेत्रीय परंपराओं में इसके शब्दों में अंतर मिल सकता है।

कालरात्रि जय जय महाकाली।

काल के मुंह से बचाने वाली॥

दुष्ट संहारक नाम तुम्हारा।

महाचंडी तेरा अवतारा॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।

महाकाली है तेरा पसारा॥

खड्ग और खप्पर रखने वाली।

दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।

सब जगह देख तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।

गाएं स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा।

कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे न बीमारी।

ना कोई गम, ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट न आवे।

महाकाली मां जिसे बचावे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।

कालरात्रि मां तेरी जय॥

आरती पूरी होने के बाद देवी को प्रणाम करें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें। आरती के शब्दों में आपकी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्नता हो सकती है।

मां कालरात्रि की पूजा का आध्यात्मिक महत्व

मां कालरात्रि की पूजा का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। उनका स्वरूप जीवन में साहस, आत्मविश्वास, धैर्य और विवेक के महत्व को भी दर्शाता है।

भय पर विजय: देवी का स्मरण हमें कठिन परिस्थितियों से भागने के बजाय उनका सामना करने की प्रेरणा देता है।

नकारात्मकता से संघर्ष: मां कालरात्रि का उग्र स्वरूप बुरे विचारों, क्रोध, अहंकार और निराशा जैसी आंतरिक बाधाओं पर विजय पाने का प्रतीक भी माना जा सकता है।

धर्म और सत्य का साथ: रक्तबीज की कथा यह संदेश देती है कि अन्याय और अधर्म के सामने विवेकपूर्ण तरीके से खड़ा होना आवश्यक है।

आत्मबल और धैर्य: देवी की उपासना के दौरान ध्यान और मंत्र जाप से व्यक्ति को अपने विचारों को व्यवस्थित करने तथा मन को स्थिर रखने में सहायता मिल सकती है।

परिवार के कल्याण की प्रार्थना: नवरात्रि में परिवार के सदस्य एक साथ पूजा करके आपसी सद्भाव, शांति और मंगल की कामना करते हैं।

मां कालरात्रि की पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

नवरात्रि के सातवें दिन पूजा करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जा सकता है:

  1. पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  2. देवी को अर्पित किए जाने वाले फूल, फल और प्रसाद साफ-सुथरे हों।
  3. पूजा के दौरान क्रोध, अपशब्द और दूसरों के प्रति दुर्भावना से बचने का प्रयास करें।
  4. मंत्रों का जाप अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार करें।
  5. पूजा में कोई सामग्री उपलब्ध न होने पर परेशान न हों; भक्ति और समर्पण को महत्व दें।
  6. परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा विधि में अंतर हो सकता है, इसलिए अपने घर की मान्यताओं का सम्मान करें।
  7. पूजा के साथ-साथ जीवन में सत्य, दया और सदाचार का पालन करने का प्रयास करें।

नवरात्रि के सातवें दिन क्या करें?

मां कालरात्रि की पूजा के दिन आप कुछ सरल धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य कर सकते हैं।

  • सुबह स्नान करके मां कालरात्रि का ध्यान करें।
  • देवी को पुष्प और गुड़ का भोग अर्पित करें।
  • ‘ॐ कालरात्र्यै नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • मां कालरात्रि की कथा पढ़ें या परिवार के सदस्यों को सुनाएं।
  • संध्या के समय देवी की आरती करें।
  • जरूरतमंदों की सहायता करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें।
  • दिनभर सकारात्मक विचार रखने और दूसरों के प्रति सद्भाव बनाए रखने का प्रयास करें।

इन कार्यों के माध्यम से नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश दैनिक जीवन में अपनाया जा सकता है।

FAQs

नवरात्रि का सातवां दिन 2026 में कब है?

वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन 17 अक्टूबर, शनिवार को है। इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी।

मां कालरात्रि का प्रिय भोग क्या है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ का भोग प्रिय माना जाता है। भक्त गुड़, गुड़ का हलवा या अपनी परंपरा के अनुसार अन्य सात्विक मिठाइयां अर्पित कर सकते हैं।

मां कालरात्रि का शुभ रंग कौन-सा है?

नवरात्रि के सातवें दिन नीले रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा कई जगह प्रचलित है। हालांकि, दिन के रंगों की परंपरा क्षेत्र और पंचांग के अनुसार अलग हो सकती है।

मां कालरात्रि का मंत्र क्या है?

मां कालरात्रि का एक सरल और प्रचलित मंत्र है—‘ॐ कालरात्र्यै नमः॥’। भक्त इसका जाप श्रद्धा और एकाग्रता के साथ कर सकते हैं।

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