गीता के अनुसार संशय को दूर करने का उपाय क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 42

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 42 तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः ।छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत ॥४२॥ अर्थात भगवान कहते हैं, अतः हे भारतवंशी अर्जुन! अपने हृदय में अज्ञान से उत्पन्न हुए इस संशय को ज्ञानरूपी तलवार से काटकर, योग (समता) में स्थित होकर और युद्ध के लिए उठ खडे हो जाव। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Verse […]

Surya Grahan 2025: साल का आखिरी सूर्य ग्रहण कब लगेगा और भारत पर इसका क्या प्रभाव होगा?

Surya Grahan 2025

Surya Grahan 2025: साल का आखिरी सूर्य ग्रहण कब लगेगा और भारत पर इसका क्या प्रभाव होगा? साल 2025 खगोलीय दृष्टि से बेहद खास है क्योंकि इसमें कई महत्वपूर्ण ग्रहण लगने वाले हैं। इनमें से अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर 2025 को घटित होगा। यह ग्रहण खास इसलिए भी है क्योंकि उसी दिन सर्वपितृ अमावस्या […]

कर्मयोग में आत्मज्ञान और निष्काम भाव का क्या महत्व है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 41

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 41 योगसंन्यस्तकर्माणं ज्ञानसंछिन्नसंशयम् ।आत्मवन्तं न कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय ॥४१॥ अर्थात भगवान कहते हैं, हे धनंजय! जो योग (समता) के द्वारा सम्पूर्ण कर्मों से पृथक हो गया है और जिसका ज्ञान के द्वारा संशय नष्ट हो गया है, ऐसा स्वरूप पुरुष कर्मों से नहीं बंधता। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Verse […]

भगवान राम को मर्यादा पुरूषोत्तम क्यों कहा जाता है?

भगवान राम को मर्यादा पुरूषोत्तम क्यों कहा जाता है?

भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहने वाले अनेक गुण हैं, लेकिन मुख्य 16 गुण जो उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहते हैं, वे इस प्रकार हैं: माता-पिता के आज्ञाकारी भगवान श्रीराम अपने बचपन से ही माता-पिता के आज्ञाकारी रहे। जब दशरथ जी ने उन्हें 14 वर्षों के वनवास का आदेश दिया, तो वे चाहें तो इंकार […]

Shardiya Navratri 2025 – तिथि घटस्थापना मुहूर्त और नियम

Shardiya Navratri 2025

Shardiya Navratri 2025 – तिथि घटस्थापना मुहूर्त और नियम Shardiya Navratri 2025 का पर्व भारत में भक्ति और श्रद्धा का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस दौरान माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है। भक्त व्रत, साधना और भक्ति में लीन होकर माता रानी से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आइए जानते हैं […]

गीता के अनुसार संशयी व्यक्ति का क्या होता है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 40

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 40 अज्ञश्चाश्रद्धानश्च संशयात्मा विनश्यति । नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः ॥४०॥ अर्थात भगवान कहते हैं, जो व्यक्ति ज्ञान और श्रद्धा से रहित है, वह असफलता को प्राप्त होता है। ऐसे श्रद्धाहीन व्यक्ति के लिए न तो यह लोक है, न परलोक, और न ही सुख। Shrimad Bhagavad Gita […]

Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष में किस समय करें पितरों का तर्पण?

Pitru Paksha 2025

हर साल पितृ पक्ष (Pitru Paksha) का समय वह पावन अवसर होता है जब हम अपने पितरों को स्मरण करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पूजा-अर्चना करते हैं। Pitru Paksha 2025 कब है? वर्ष 2025 में पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से होगी और यह 15 दिनों तक […]

श्रद्धा और संयम से कैसे मिलती है परम शांति?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 39

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 39 श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः । ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति ॥३९॥ अर्थात भगवान कहते हैं, श्रद्धावान, बुद्धिमान और साधन संपन्न व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करता है और ज्ञान प्राप्त कर लेने पर उसे तुरन्त परम शांति प्राप्त हो जाती है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Shloka 39 Meaning in Hindi क्या […]

Ramayana: Myth or History? भारत के मंदिरों में छिपा सच!

Ramayna

रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवनशैली का आधार भी है। यह प्रश्न आज भी लोगों के मन में बना हुआ है कि क्या रामायण केवल एक कथा है या यह वास्तव में घटित हुई घटनाओं का विवरण है। भारत के कई प्राचीन मंदिर और स्थल आज भी Ramayana की […]

Bhadrapada Purnima 2025: तिथि शुभ मुहूर्त चंद्रग्रहण का समय और धार्मिक महत्व

Chandra Grahan

भाद्रपद पूर्णिमा 2025: तिथि शुभ मुहूर्त चंद्रग्रहण का समय और धार्मिक महत्व हिंदू पंचांग में प्रत्येक पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है, लेकिन भाद्रपद पूर्णिमा का स्थान और भी खास माना गया है। इस वर्ष 2025 में Bhadrapada Purnima का पर्व 07 सितंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन धार्मिक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण […]

क्या यज्ञ दान और तप से बढ़कर ज्ञान पवित्र है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 38

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 38 न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते । तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति ॥३८॥ अर्थात भगवान कहते हैं, इस मानव जगत में ज्ञान के समान शुद्धि का कोई अन्य साधन नहीं है। जिसका योग भली-भाँति सिद्ध हो चुका है (कर्मयोगी) वह अपने भीतर स्थित उस तत्व का ज्ञान अवश्य प्राप्त कर […]

क्या ज्ञानरूपी अग्नि सभी पाप और कर्मों को जला सकती है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 37

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 37 यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुते ऽर्जुन ।ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा ॥३७॥ अर्थात भगवान कहते हैं, हे अर्जुन! जिस प्रकार प्रज्वलित अग्नि ईंधन को पूर्णतः भस्म कर देती है, उसी प्रकार ज्ञानरूपी अग्नि समस्त कर्मों को पूर्णतः भस्म कर देती है। shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Shloka 37 Meaning in Hindi क्या ज्ञानरूपी […]