Dussehra 2025 : तिथि रावण दहन शुभ मुहूर्त महत्व और उपाय

Dussehra 2025

Dussehra 2025 : तिथि रावण दहन शुभ मुहूर्त महत्व और उपाय दशहरा 2025 कब है? विजयादशमी की तिथि, रावण दहन का सही समय, दशहरे का महत्व और सफलता पाने के उपाय जानें। पढ़ें दशहरा 2025 की संपूर्ण जानकारी। Dussehra 2025 तिथि और रावण दहन का शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, दशहरा या विजयादशमी आश्विन […]

क्या सांख्य योग और कर्म योग के फल अलग-अलग हैं?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 4

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 4 सांख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पण्डिताः । एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ॥४॥ अर्थात भगवान कहते हैं, सांख्य योग और कर्म योग को भिन्न फल देने वाला कहने वाले ज्ञानी नहीं, अज्ञानी लोग हैं, क्योंकि जो व्यक्ति इन दोनों में से किसी एक साधन में पारंगत है, वह दोनों के फलस्वरूप परमात्मा […]

Sarv Pitru Amavasya 2025 : तिथि पूजा विधि और महत्व

Sarv Pitru Amavasya 2025

Sarv Pitru Amavasya 2025 : तिथि पूजा विधि और महत्व सर्वपितृ अमावस्या हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और इसे उन सभी पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए समर्पित माना जाता है। जो लोग अपने पितरों की पुण्यतिथि नहीं जानते, वे […]

कर्मयोगी और संन्यासी में क्या अंतर है? 

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 3

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 3 ज्ञेयः स नित्यसंन्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति । निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते ॥३॥ भगवान ने कहा हे महाबाहो! जो पुरुष न तो किसी से द्वेष करता है और न किसी की इच्छा करता है, वह (कर्मयोगी) नित्य तपस्वी मानने योग्य है, क्योंकि जो पुरुष द्वन्द्वों से रहित […]

Pradosh Vrat 2025 : तिथि मुहूर्त महत्व और पूजा विधि

Pradosh Vrat 2025

Pradosh Vrat 2025 : तिथि मुहूर्त महत्व और पूजा विधि हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। […]

भगवान श्रीकृष्ण ने संन्यास से ऊपर कर्मयोग को क्यों बताया?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 2

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 2 श्रीभगवानुवाच ।संन्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौ ।तयोस्तु कर्मसंन्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते ॥२॥ भगवान ने कहा – संन्यास (सांख्य योग) और कर्म योग – दोनों ही लाभकारी हैं। लेकिन दोनों में से कर्म योग, कर्म संन्यास (सांख्य योग) से बेहतर है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 2 Meaning in hindi क्या संन्यास से […]

दशहरा पर निबंध: Essay on Dussehra in Hindi [2025]

दशहरा पर निबंध

दशहरा भारत का प्रमुख त्यौहार है जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है। यह त्योहार अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है और हर साल बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दशहरा पर निबंध (100 शब्दों में) दशहरा भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है। […]

Indira Ekadashi Vrat Katha : इंदिरा एकादशी की संपूर्ण कथा और महत्व

Indira Ekadashi Vrat Katha

Indira Ekadashi Vrat Katha : इंदिरा एकादशी की संपूर्ण कथा और महत्व हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को विशेष स्थान प्राप्त है। वर्षभर आने वाली 24 एकादशियों में से अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से पितृपक्ष में आता है, इसलिए इसका महत्व और […]

क्यों आज भी राम की रावण पर विजय हमारे जीवन में मायने रखती है

क्यों आज भी राम की रावण पर विजय हमारे जीवन में मायने रखती है

रामायण की कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ की कहानी नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू को छूती है। भगवान श्रीराम की रावण पर विजय अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। यह केवल हजारों साल पहले घटित हुई घटना नहीं है, बल्कि आज भी हमारे जीवन में प्रासंगिक है। बदलते समय, जटिल […]

भगवद गीता में संन्यास और कर्मयोग में कौन है श्रेष्ठ?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 1

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 1 अर्जुन उवाचसंन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् ।।१।। अर्जुन ने कहा – हे कृष्ण! आप कर्म के त्याग की, फिर कर्मयोग की प्रशंसा करते हैं। अतः इन दोनों साधनों में से जो निश्चित रूप से कल्याणकारी हो, उसे बताइए। Shrimad Bhagavad Gita Chapter […]

Karwa Chauth 2025 Date & Puja Vidhi – तिथि मुहूर्त पूजा विधि कथा और महत्व

Karwa Chauth 2025

Karwa Chauth 2025 Date & Puja Vidhi – तिथि मुहूर्त पूजा विधि कथा और महत्व करवा चौथ हिंदू धर्म का एक बेहद पावन और सुहावना व्रत है, जिसे हर साल सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना के लिए करती हैं। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की […]

गीता के अनुसार संशय को दूर करने का उपाय क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 42

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 42 तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः ।छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत ॥४२॥ अर्थात भगवान कहते हैं, अतः हे भारतवंशी अर्जुन! अपने हृदय में अज्ञान से उत्पन्न हुए इस संशय को ज्ञानरूपी तलवार से काटकर, योग (समता) में स्थित होकर और युद्ध के लिए उठ खडे हो जाव। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Verse […]