Krishna Janmashtami 2025: 15 या 16 अगस्त, कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक पवित्र और आनंदमय पर्व है, जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह उत्सव भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पूरे देश में भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने आठवें […]
क्या मोक्ष प्राप्त होने पर भी कर्तव्य-कर्म करना आवश्यक है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 15 एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः । कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् ।।१५।। अर्थात भगवान कहते हैं, पूर्वकाल में ज्ञानी पुरुषों ने भी ऐसा जानकर कर्म किए थे, इसलिए तुम भी उन्हीं के समान अपने पूर्वजों द्वारा अनादि काल से किए गए कर्मों को करो। shrimad Bhagavad Gita […]
क्या भगवान सृष्टि के कर्ता होते हुए भी अकर्ता हैं?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 13 14 चातुर्वर्ण्य मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः । तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम् ॥१३॥न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा । इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते ॥१४॥ अर्थात भगवान कहते हैं, मेरे द्वारा ही गुण और कर्म के अनुसार चारों वर्णों की सृष्टि हुई है। यद्यपि मैं उस (सृष्टि आदि) […]
क्या देवताओं की पूजा से मिलने वाला कर्मफल स्थायी होता है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 12 काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः । क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा ॥१२॥ अर्थात भगवान कहते हैं, जो मनुष्य अपने कर्मों का फल चाहते हैं, वे देवताओं की पूजा करते हैं, क्योंकि इस मनुष्य लोक में कर्मों का फल शीघ्र प्राप्त होता है। shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 […]
क्या भगवान हर भक्त को उसके भाव के अनुसार स्वीकार करते हैं?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 11 ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् । मम वर्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥११॥ अर्थात भगवान कहते हैं, हे पृथानंदन! जो भक्त मेरी शरण में जिस तरह आते हैं, उन्हें मैं उसी प्रकार शरण देता हूँ, क्योंकि सभी मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं। shrimad […]
राग भय और क्रोध से मुक्त होकर ईश्वर को कैसे पाया जा सकता है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 10 वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः ।बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः ।।१०।। अर्थात भगवान कहते हैं, राग भय और क्रोध से सर्वथा रहित मेरे में ही तल्लीन, मेरे ही आश्रित तथा ज्ञान रूपी तप से पवित्र हुए कितने ही भक्त मेरे भाव (स्वरूप) को प्राप्त हो चुके हैं। shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 […]
भगवान के दिव्य जन्म और कर्म को जानने से क्या होता है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 9 जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः । त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥ ९ ॥ अर्थात भगवान कहते हैं, हे अर्जुन! मेरे जन्म और कर्म दिव्य हैं। इस प्रकार जो पुरुष (मेरे जन्म और कर्मों को) तत्त्व सहित जानता है, अर्थात् उनमें दृढ़ विश्वास रखता है, […]
क्या भगवान हर युग में अवतार लेते हैं धर्म की स्थापना के लिए?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 8 परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ॥ ८॥ अर्थात भगवान कहते हैं, मैं संतों (भक्तों) की रक्षा करने, पापियों का विनाश करने तथा धर्म की स्थापना करने के लिए युग-युग में प्रकट होता हूँ। shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Shloka 8 Meaning in Hindi अगर […]
भगवान कब लेते हैं अवतार? जानिए गीता का रहस्य, अध्याय 4 श्लोक 7

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 7 यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ ७॥ अर्थात भगवान कहते हैं, हे भरतपुत्र अर्जुन! जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं साकार रूप में प्रकट होता हूँ। shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Shloka 7 Meaning in Hindi […]
ईश्वर अजन्मा होकर भी क्यों प्रकट होते हैं? जानें योगमाया का रहस्य

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 6 अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन् । प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय संभवाम्यात्ममायया ॥६॥ श्री भगवान बोले यद्यपि मैं अजन्मा, अविनाशी तथा समस्त प्राणियों का स्वामी हूँ, तथापि मैं अपनी प्रकृति को वश में करके अपनी योगमाया से स्वयं को प्रकट करता हूँ। shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Shloka 6 Meaning in Hindi ईश्वर […]
श्रीकृष्ण को अपने सभी जन्म कैसे याद हैं? क्या हम भी जान सकते हैं अपने पूर्वजन्म?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 5 श्रीभगवानुवाचबहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन । तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परंतप ॥५॥ श्री भगवान बोले – हे परंतप अर्जुन! तुम्हारे और मेरे अनेक जन्म हो चुके हैं। मैं उन सबको जानता हूँ, परन्तु तुम नहीं जानते। shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Shloka 5 Meaning in Hindi […]
क्या ईश्वर समय से परे होते हैं? अर्जुन ने श्रीकृष्ण से पूछा!

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 4 अर्जुन उवाचअपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः । कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति ॥४॥ अर्जुन बोले – आपका जन्म तो अभी हुआ है और सूर्य का जन्म तो बहुत प्राचीन है। अतः मैं यह कैसे समझूँ कि सृष्टि के आरंभ में आपने ही सूर्य को यह योग दिया था? shrimad Bhagavad […]