कैसे पांडवों ने अपनी शंख ध्वनि से कौरवों के हृदय चीर दिए?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 19

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 19 स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् |नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलोऽभ्यनुनादयन् || 19 || Bhagavad Geeta Chapter 1 Verse 19 Meaning अर्थात पांडव सेना के शंखों की भयानक ध्वनि से आकाश और पृथ्वी हिल गई, जिससे अन्यायपूर्वक राज्य हड़प लेने वाले दुर्योधन आदि के हृदय को चिर डालें। Bhagavad Gita Chapter […]

महाभारत युद्ध में शंखनाद का रहस्य और योद्धाओं की भूमिका, अध्याय 1

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 17 18

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 17 18 काश्यश्च परमेष्वास: शिखण्डी च महारथ: |धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजित: || 17 ||द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वश: पृथिवीपते |सौभद्रश्च महाबाहु: शङ्खान्दध्मु: पृथक् पृथक् || 18 || Bhagavad Geeta Chapter 1 Verse 17 18 Meaning अर्थात संजय ने धृतराष्ट्र से कहा, हे राजन! श्रेष्ठ धनुष वाले काशीराज और महारथी शिखंडी तथा धृष्टद्युम्न वही […]

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 15 16 महाभारत के शक्तिशाली शंखों का रहस्य

Bhagavad Gita Chapter 15 16

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 15 16 पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जय: |पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदर: || 15 ||अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर: |नकुल: सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ || 16 || Bhagawat Geeta Chapter 1 Verse 15 16 Meaning अर्थात अंतर्यामी भगवान श्री कृष्ण ने पाञ्चजन्य नाम का तथा धनंजय अर्जुन ने देवदत्त नाम का शंख बजाया, और […]

क्या है अर्जुन के दिव्य रथ और शंख का रहस्य?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 14

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 14 तत: श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ |माधव: पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतु: || 14 || अर्थात भीष्म जी के शंखनाद के बाद सफेद अश्व से जुड़ा हुआ महान रथ ऊपर, बैठे हुए लक्ष्मीपति भगवान श्री कृष्ण और पांडु पुत्र अर्जुन ने दिव्य शंखो बहुत ही जोर से बजाएं।  Bhagavad Gita Chapter […]

क्या भीष्म पितामह ने वास्तव में युद्ध की घोषणा के लिए शंख बजाया था?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 13

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 13 तत: शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखा: |सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् || 13 || अर्थात भीष्म जी के शंखनाद के बाद शंख भैरी अर्थात नगाड़े, ढोल, मृदंग और रणसिंगे विगेरे वाजिंत्र एक साथ बजने लगे, और इसका शब्द बड़ा ही भयंकर था। Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 13 Meaning in hindi तत: शङ्खाश्च […]

भीष्म के शंखनाद का रहस्य: क्यों गूंज उठी कुरुक्षेत्र की भूमि?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 12

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 12 तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्ध: पितामह: |सिंहनादं विनद्योच्चै: शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् || 12 || अर्थात संजय कहते हैं दुर्योधन के हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए कुरुवृद्ध प्रभावशाली पितामह भीष्म ने सिंह के जैसे गर्जना करके जोर से शंख बजाया। Shrimad Bhagawat Geeta Chapter 1 Shloka 12 Meaning in hindi तस्य […]

महाभारत युद्ध में क्यों जरूरी था भीष्म का रक्षण?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 11

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 11 अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिता: |भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्त: सर्व एव हि || 11|| अर्थात दुर्योधन अपनी सेना को कहता है, आप सब के सब लोग मोर्चे पर अपने अपने स्थान पर दृढ़ता से खड़े रहकर ही पितामह भीष्म का चारों ओर से रक्षण करो। Shrimad Bhagawat Geeta Chapter 1 Shloka 11 […]

क्या दुर्योधन की सेना सच में पांडवों से कमजोर थी?

दुर्योधन की सेना

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 10 अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् |पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् || 10 || अर्थात दुर्योधन द्रोणाचार्य से कहता है यह हमारी सेना पांडवों के ऊपर विजय प्राप्त करने के लिए अपूर्ण है। असमर्थ हैं क्योंकि उनके सरंक्षक (दोनों पक्ष का अच्छा चाहनारे) पितामह भीष्म है। परंतु यह पांडवों की सेना हमारे […]

कौन थे वे शूरवीर जिन्होंने दुर्योधन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 9

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 9 अन्ये च बहव: शूरा मदर्थे त्यक्तजीविता: |नानाशस्त्रप्रहरणा: सर्वे युद्धविशारदा: || 9 || अर्थात दुर्योधन अपनी सेना के महायोद्धा के नाम लेने के बाद द्रोणाचार्य को ऐसा कहता है, उन सब के बावजूद भी दूसरे कितने ही शूरवीर हैं। जिन्होंने मेरे लिए अपनी जीने की इच्छा का भी त्याग कर […]

महाभारत युद्ध में दुर्योधन की सबसे बडी ताकत कौन थे? जानिए इन महायोद्धाओं की कहानी

दुर्योधन

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 8 भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जय: |अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च || 8 || अर्थात दुर्योधन द्रोणाचार्य से कहता है, आप (द्रोणाचार्य) और पितामह भीष्म तथा कर्ण और संग्रामविजयी कृपाचार्य तथा ऐसे ही अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत के पुत्र भूरिश्रवा भी हमारी सेना में है। Shrimad Bhagawat Geeta Chapter 1 Verse 8 […]

क्या दुर्योधन का आत्मविश्वास वास्तविक था या मात्र एक छलावा?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 7

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 7 अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम |नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते || 7|| अर्थात दुर्योधन द्रोणाचार्य से कहते हैं, हैं द्विजोतम! हमारे पक्ष में भी जो मुख्य है, उनके ऊपर भी आप ध्यान दीजिए! आपको याद दिलाने के लिए मेरी सेना के जो नायक है, उनको मैं कहता […]

महाभारत युद्ध में पांडवों की ताकत कौन थे? जानिए वीर योद्धाओं के नाम

महाभारत युद्ध

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 4 5 6 अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधियुयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथ: || 4 ||धृष्टकेतुश्चेकितान: काशिराजश्च वीर्यवान् |पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गव: || 5 ||युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् |सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथा: || 6 || अर्थात यहां पांडवों की सेना में बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बड़े-बड़े धनुष्य हैं, तथा जो युद्ध में […]