महाभारत युद्ध में क्यों जरूरी था भीष्म का रक्षण?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 11 अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिता: |भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्त: सर्व एव हि || 11|| अर्थात दुर्योधन अपनी सेना को कहता है, आप सब के सब लोग मोर्चे पर अपने अपने स्थान पर दृढ़ता से खड़े रहकर ही पितामह भीष्म का चारों ओर से रक्षण करो। Shrimad Bhagawat Geeta Chapter 1 Shloka 11 […]
क्या दुर्योधन की सेना सच में पांडवों से कमजोर थी?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 10 अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् |पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् || 10 || अर्थात दुर्योधन द्रोणाचार्य से कहता है यह हमारी सेना पांडवों के ऊपर विजय प्राप्त करने के लिए अपूर्ण है। असमर्थ हैं क्योंकि उनके सरंक्षक (दोनों पक्ष का अच्छा चाहनारे) पितामह भीष्म है। परंतु यह पांडवों की सेना हमारे […]
कौन थे वे शूरवीर जिन्होंने दुर्योधन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 9 अन्ये च बहव: शूरा मदर्थे त्यक्तजीविता: |नानाशस्त्रप्रहरणा: सर्वे युद्धविशारदा: || 9 || अर्थात दुर्योधन अपनी सेना के महायोद्धा के नाम लेने के बाद द्रोणाचार्य को ऐसा कहता है, उन सब के बावजूद भी दूसरे कितने ही शूरवीर हैं। जिन्होंने मेरे लिए अपनी जीने की इच्छा का भी त्याग कर […]
महाभारत युद्ध में दुर्योधन की सबसे बडी ताकत कौन थे? जानिए इन महायोद्धाओं की कहानी

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 8 भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जय: |अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च || 8 || अर्थात दुर्योधन द्रोणाचार्य से कहता है, आप (द्रोणाचार्य) और पितामह भीष्म तथा कर्ण और संग्रामविजयी कृपाचार्य तथा ऐसे ही अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत के पुत्र भूरिश्रवा भी हमारी सेना में है। Shrimad Bhagawat Geeta Chapter 1 Verse 8 […]
क्या दुर्योधन का आत्मविश्वास वास्तविक था या मात्र एक छलावा?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 7 अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम |नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते || 7|| अर्थात दुर्योधन द्रोणाचार्य से कहते हैं, हैं द्विजोतम! हमारे पक्ष में भी जो मुख्य है, उनके ऊपर भी आप ध्यान दीजिए! आपको याद दिलाने के लिए मेरी सेना के जो नायक है, उनको मैं कहता […]
महाभारत युद्ध में पांडवों की ताकत कौन थे? जानिए वीर योद्धाओं के नाम

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 4 5 6 अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधियुयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथ: || 4 ||धृष्टकेतुश्चेकितान: काशिराजश्च वीर्यवान् |पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गव: || 5 ||युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् |सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथा: || 6 || अर्थात यहां पांडवों की सेना में बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बड़े-बड़े धनुष्य हैं, तथा जो युद्ध में […]
दुर्योधन ने गुरुद्वाराचार्य को पांडवों की सेना के बारे में क्या बताया?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 3 पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् ।व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ।। 3।। अर्थात दुर्योधन गुरु द्रोणाचार्य को कहते हैं, है आचार्य! आपके बुद्धिमान शिष्य ध्रुपद पुत्र धृष्टद्युम्न द्वारा व्यूह रचना से खडी की गई, पांडवों की यह बहुत बडी सेना को तो देखो। Shrimad Bhagawat Geeta Chapter 1 Shloka 3 […]
क्यों युद्ध से पहले दुर्योधन गया द्रोणाचार्य के पास?

सञ्जय उवाच । दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा । आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ।। 2।। अर्थात संजय ने कहा उस समय वज्र व्यूह से खड़ी हुई पांडवसेना को देखकर राजा दुर्योधन द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन बोलते हैं। दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढम : पांडवों की वज्र व्यूह से खड़ी सेना को देखने का तात्पर्य है […]
धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र: भगवद गीता के पहले श्लोक का गूढ़ अर्थ और जीवन संदेश

धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ।।१।। अर्थात धृतराष्ट्र बोले, है संजय! धर्म भूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे और पांडव के पुत्रों ने क्या किया? धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे : कुरुक्षेत्र में देवों ने यज्ञ किया था, कुरु राजाओं ने भी यहां तप किया था, यज्ञ वगैरे धर्ममय कार्य होने […]