परमात्मा में स्थित साधक पुनर्जन्म से कैसे मुक्त होता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 17 तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः ।गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः ॥१७॥ जो साधक परमात्मा के प्रति समर्पित हैं, जिनकी बुद्धि प्रकाशित हो रही है, जिनका मन प्रकाशित हो रहा है, जिनकी स्थिति परम तत्व में है, वे ज्ञान के द्वारा पाप से मुक्त हो जाते हैं और अ-पुनरावृत्ति(परम गति) की परम अवस्था को प्राप्त होते हैं। […]
अज्ञान दूर करने का एकमात्र उपाय क्या है? – श्रीकृष्ण का उत्तर

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 16 ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः ।तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ।।१६।। अर्थात भगवान कहते हैं, परन्तु जिन्होंने अपने ज्ञान (विवेक) के द्वारा उस अज्ञान को नष्ट कर दिया है, उनके लिए वह ज्ञान सूर्य के समान परम सत्ता परमात्मा को प्रकाशित करता है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 16 Meaning […]
Govardhan Puja 2025: 21 या 22 अक्तूबर कब है? जानें तिथि महत्व और पूजा विधि

Govardhan Puja 2025: 21 या 22 अक्तूबर कब है? जानें तिथि महत्व और पूजा विधि दीपावली के बाद आने वाला गोवर्धन पूजा का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण की उस अद्भुत लीला को स्मरण कराता है, जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर गोकुलवासियों […]
Narak Chaurdashi 2025: श्रीकृष्ण के विजय दिवस से लेकर वामन अवतार तक – जानें तीन दिव्य कथाएँ और धार्मिक महत्व

Narak Chaurdashi 2025: श्रीकृष्ण के विजय दिवस से लेकर वामन अवतार तक – जानें तीन दिव्य कथाएँ और धार्मिक महत्व दीपावली का हर दिन कुछ खास महत्व रखता है, और उसी श्रृंखला में आता है — नरक चतुर्दशी, जिसे नानी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व […]
अगर भगवान सबके भीतर हैं तो फिर पाप-पुण्य से अलग कैसे हैं?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 15 नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं विभुः । अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः ।॥१५॥ अर्थात भगवान कहते हैं, सर्वव्यापी परमात्मा न तो किसी के अच्छे और न ही बुरे कर्मों को स्वीकार करते है, परन्तु ज्ञान अज्ञान से ढका हुआ है और सभी प्राणी उससे मोहित हो रहे हैं। Shrimad […]
Rama Ekadashi Vrat Katha : राजा मुचुकुंद चंद्रभागा और शोभन की अद्भुत पौराणिक कथा

Rama Ekadashi Vrat Katha : राजा मुचुकुंद चंद्रभागा और शोभन की अद्भुत पौराणिक कथा Rama Ekadashi 2025 कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (जिन्हें रमा भी कहा जाता है) को समर्पित है। रमा एकादशी को करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि […]
कर्मों का कर्ता कौन है – मनुष्य या ईश्वर?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 14 न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः ।न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते ॥१४॥ अर्थात भगवान कहते हैं, ईश्वर मनुष्य को उसके कर्मों, कार्यों या उसके परिणामों के आधार पर नहीं बनाता, बल्कि प्रकृति ही उसके लिए कार्य करती है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 14 Meaning in hindi कर्मों […]
Chhath Puja 2025: नहाय खाय से उगते सूर्य को अर्घ्य तक – तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व की पूरी जानकारी

Chhath Puja 2025 क्या है? इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का महापर्व है, जो आस्था, तपस्या और परिवार की मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है, लेकिन अब यह […]
Diwali 2025: दिवाली कब है? धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिवसीय दीपोत्सव की पूरी जानकारी

Diwali 2025: दिवाली कब है? धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिवसीय दीपोत्सव की पूरी जानकारी जानिए Diwali 2025 कब है, इस साल धनतेरस से भाई दूज तक पांचों त्योहारों की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व। दीपावली 2025 की तारीख, लक्ष्मी पूजन का समय, गोवर्धन पूजा और भाई दूज के पर्व की पूरी जानकारी। दिवाली […]
कर्म न करते हुए भी सांख्य योगी कैसे सुखपूर्वक रहता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 13 सर्वकर्माणि मनसा संन्यस्यास्ते सुखं वशी । नवद्वारे पुरे देही नैव कुर्वन्न कारयन् ॥१३॥ अर्थात भगवान कहते हैं, वश में किये हुए शरीर वाला मनुष्य, शुद्ध मन से सम्पूर्ण कर्मों का त्याग करके, नौ द्वारों वाले शरीर रूपी नगर में (अपने स्वरूप में) सुखपूर्वक स्थित रहता है, भले ही वह […]
Rama Ekadashi 2025: तिथि शुभ मुहूर्त पूजा विधि और महत्व

Rama Ekadashi 2025: तिथि शुभ मुहूर्त पूजा विधि और महत्व रमा एकादशी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आता है और इसे करने से भक्तों को धन, सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस लेख में […]
निष्काम भाव से कर्म करने का रहस्य क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 12 युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम् ।अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते ॥१२॥ अर्थात भगवान कहते हैं, कर्मयोगी अपने कर्मों के फलों का त्याग करके आध्यात्मिक शांति प्राप्त करता है, लेकिन भौतिकवादी व्यक्ति कामनाओं के कारण कर्मों के फलों में आसक्त हो जाता है और बंध जाता है। Shrimad Bhagavad Gita […]