Author name: Kajal Makwana

नमस्कार दर्शकों मित्रो मेरा नाम Kajal Makwana है, में एक ब्लॉगर और यूट्यूबर हूं, तथा में आध्यात्मिकता (Spirituality) की श्रेणी में कंटेंट लिखती हूं और यूट्यूब पर विडियोज भी बनाती हूं। मुझे सनातन धर्म के बारे में जानना, आध्यात्मिकता को गहराई से समझना और हमारे हिन्दू धर्म के शास्त्रों जैसे रामायण, महाभारत, श्रीमद भगवद गीता, पुराण, तथा वेदों को पढ़ना बहुत पसंद है। मेरा लक्ष्य है कि मेरे लेखों और वीडियो के माध्यम से आपको (दर्शकों) सच्ची आध्यात्मिकता का अनुभव करा सकू, और हम सब के मन में ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत हो ऐसा कुछ कर सकू, तथा आध्यात्मिकता बढ़ने से समाज में शायद बुरे कर्म करने वाले कुछ समझे सके! और आने वाली पीढ़ी भी सनातन धर्म को गहराई से समझ सके। Follow me on: YouTube

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 13

ध्यान में नाक के अग्रभाग पर दृष्टि रखने का क्या अर्थ है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 13 समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः । सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥१३॥ शरीर, सिर और गर्दन

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 12

ध्यान में मन और इंद्रियों को एकाग्र क्यों करना चाहिए?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 12 तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः । उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये ॥१२॥ उस आसन पर बैठकर मन को

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 11

ध्यान का आसन न ज्यादा ऊंचा और न ज्यादा नीचा क्यों होना चाहिए?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 11 शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः । नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम् ।।११।। शुद्ध भूमि ऊपर जिसके ऊपर

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Chanakya Niti The art of finding solutions in any situation

Chanakya Niti : किसी भी परिस्थिति में समाधान खोजने की कला

Chanakya Niti : किसी भी परिस्थिति में समाधान खोजने की कला चाणक्य नीति बताती है कि हर समस्या का समाधान

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 10

काम करते समय भगवान का चिंतन क्यों आवश्यक है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 10 योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः । एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः ॥१०॥ जो योगी सुख की

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Chanakya Niti How to identify a real and fake friend

Chanakya Niti : असली और नकली मित्र की पहचान कैसे करें?

Chanakya Niti : असली और नकली मित्र की पहचान कैसे करें? मानव जीवन में मित्रता का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 9

सभी लोगों के प्रति समबुद्धि क्यों आवश्यक है? गीता के इस उपदेश का क्या रहस्य है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 9 सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते ॥९॥ श्रुहद, मित्र, वेरी, उदासीन, मध्यस्थी, द्वेशी और संबंधियों

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 8

क्या मिट्टी–पत्थर–सोने को समान देखने वाला ही योग में स्थित होता है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 8 ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा कूटस्थो विजितेन्द्रियः । युक्त इत्युच्यते योगी समलोष्टाश्मकाञ्चनः ॥८॥ जिनका अंत:करण ज्ञान विज्ञान द्वारा

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