Author name: Kajal Makwana

नमस्कार दर्शकों मित्रो मेरा नाम Kajal Makwana है, में एक ब्लॉगर और यूट्यूबर हूं, तथा में आध्यात्मिकता (Spirituality) की श्रेणी में कंटेंट लिखती हूं और यूट्यूब पर विडियोज भी बनाती हूं। मुझे सनातन धर्म के बारे में जानना, आध्यात्मिकता को गहराई से समझना और हमारे हिन्दू धर्म के शास्त्रों जैसे रामायण, महाभारत, श्रीमद भगवद गीता, पुराण, तथा वेदों को पढ़ना बहुत पसंद है। मेरा लक्ष्य है कि मेरे लेखों और वीडियो के माध्यम से आपको (दर्शकों) सच्ची आध्यात्मिकता का अनुभव करा सकू, और हम सब के मन में ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत हो ऐसा कुछ कर सकू, तथा आध्यात्मिकता बढ़ने से समाज में शायद बुरे कर्म करने वाले कुछ समझे सके! और आने वाली पीढ़ी भी सनातन धर्म को गहराई से समझ सके। Follow me on: YouTube

Chanakya Niti on Failure in Hindi

Chanakya Niti on Failure in Hindi : असफलता से सफलता की ओर बढ़ने के 9 शक्तिशाली नियम

Chanakya Niti on Failure in Hindi : असफलता से सफलता की ओर बढ़ने के 9 शक्तिशाली नियम असफलता जीवन का […]

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 7

मान-अपमान को समान भाव से कैसे स्वीकारें? गीता क्या सिखाती है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 7 जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः । शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥७॥ जिसने अपने आप पर विजय

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 6

क्या स्वयं को जीतना ही सच्ची आध्यात्मिक विजय है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 6 बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः ।अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत् ॥६॥ जिसने खुद को जीत लिया है,

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Chanakya Neeti

Chanakya Neeti : सफलता नीति रिश्तों और राजनीति का गहन ज्ञान

Chanakya Neeti : सफलता नीति रिश्तों और राजनीति का गहन ज्ञान चाणक्य (कौटिल्य/विष्णुगुप्त) न केवल एक महान राजनेता थे, बल्कि

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 5

क्या सच में इंसान स्वयं ही अपना मित्र और शत्रु होता है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 5 उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् । आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥५॥ खुद के ज़रिए खुद को बचाना।

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Chanakya Neeti for Success

Chanakya Neeti for Success : जीवन बदलने वाली 10 महत्वपूर्ण सीखें

Chanakya Neeti for Success : जीवन बदलने वाली 10 महत्वपूर्ण सीखें भारतीय इतिहास में चाणक्य-जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 4

क्या आसक्ति-मुक्त जीवन ही सच्चे योग की पहचान है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 4 यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते । सर्वसंकल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते ॥४॥ अर्थात भगवान कहते हैं, जिस

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Mokshada Ekadashi 2025 Date time

Mokshada Ekadashi 2025 : तिथि महत्व पूजा-विधि शुभ मुहूर्त और पारण समय

Mokshada Ekadashi 2025 : तिथि महत्व पूजा-विधि शुभ मुहूर्त और पारण समय मित्रों, मार्गशीर्ष मास की पवित्र और पुण्यमयी मोक्शदा

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 3

Bhagavad Gita – क्या निष्काम कर्म से ही योग मिलता है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 3 आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते । योगारूढस्य तस्यैव ‘शमः कारणमुच्यते ॥३॥ जो ध्यान करने वाला योगी

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Vivah Panchami Vrat Katha 2025

Vivah Panchami Katha 2025: श्रीराम–सीता विवाह की पवित्र कथा व्रत का महत्व और शुभ लाभ

Vivah Panchami Katha 2025: श्रीराम–सीता विवाह की पवित्र कथा व्रत का महत्व और शुभ लाभ भारत की सनातन परंपरा में

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 2

क्या हर रोज़ के तनाव से मुक्त होने का तरीका सिर्फ़ ‘आसक्ति त्याग’ है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 2 यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पाण्डव । न ह्यसंन्यस्तसंकल्पो योगी भवति कश्चन ॥२॥ हे

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