कर्मयोगी इन्द्रियों को वश में करके जीवन में क्या लाभ पाता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 7 योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः ।सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते ॥७॥ अर्थात भगवान अर्जुन को कहते हैं, जो कर्मयोगी अपनी इन्द्रियों को वश में रखता है, जिसका मन शुद्ध है, जिसका शरीर वश में है, तथा जिसकी आत्मा समस्त प्राणियों की आत्मा है, वह कर्म करते हुए भी आसक्त नहीं होता। […]
क्या आप सच में रामायण को जानते हैं? 10 प्रमाण जो बताते हैं कि श्रीराम ने कभी सीता माता का त्याग नहीं किया और अग्निपरीक्षा वास्तविक नहीं थी

भारतीय संस्कृति और धर्म में रामायण का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन समय के साथ इसमें कई कहानियाँ जोड़ी गईं, जिनमें सबसे विवादित प्रसंग है — सीता माता का त्याग और अग्निपरीक्षा। बहुत से लोग मानते हैं कि श्रीराम ने सीता माता को वनवास भेजा था, जबकि मूल वाल्मीकि रामायण में ऐसा कोई उल्लेख नहीं […]
Navratri Day 5 देवी स्कंदमाता: पूजा विधि मंत्र भोग और कथा

Navratri Day 5 देवी स्कंदमाता: पूजा विधि मंत्र भोग और कथा नवरात्रि का पावन पर्व साल में दो बार आता है और भारतभर में इसे अत्यंत श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। हर दिन माँ दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की आराधना की जाती है। नवरात्रि 2025 के पांचवें दिन देवी स्कंदमाता की पूजा का […]
क्या संन्यास बिना कर्मयोग के संभव है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 6 संन्यासस्तु महाबाहो दुःखमाप्तुमयोगतः ।योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म चिरेणाधिगच्छति ॥६॥ अर्थात भगवान अर्जुन को कहते हैं, परन्तु हे महाबाहो! कर्मयोग के बिना संन्यास प्राप्त करना कठिन है। मननशील कर्मयोगी शीघ्र ही ब्रह्म को प्राप्त कर लेता है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 6 Meaning in hindi क्या संन्यास बिना कर्मयोग के […]
Navratri Day 3 – माता चंद्रघंटा व्रत कथा और महत्व Maa Chandraghanta Vrat Katha 2025

Navratri Day 3 – माता चंद्रघंटा व्रत कथा और महत्व Maa Chandraghanta Vrat Katha 2025 नवरात्रि का तीसरा दिन माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप को समर्पित है। इस दिन की पूजा और व्रतकथा सुनने से भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में शांति, साहस और समृद्धि का संचार होता है। आइए विस्तार […]
सांख्य योग और कर्म योग में क्या है समानता?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 5 यत्सांख्यैः प्राप्यते स्थानं तद्योगैरपि गम्यते । एकं सांख्यं च योगं च यः पश्यति स पश्यति ॥५॥ अर्थात भगवान कहते हैं, जो तत्व सांख्य योगियों को प्राप्त होता है, वही कर्म योगियों को भी प्राप्त होता है। अतः जो व्यक्ति सांख्य योग और कर्म योग को एक ही रूप में […]
Dussehra 2025 : तिथि रावण दहन शुभ मुहूर्त महत्व और उपाय

Dussehra 2025 : तिथि रावण दहन शुभ मुहूर्त महत्व और उपाय दशहरा 2025 कब है? विजयादशमी की तिथि, रावण दहन का सही समय, दशहरे का महत्व और सफलता पाने के उपाय जानें। पढ़ें दशहरा 2025 की संपूर्ण जानकारी। Dussehra 2025 तिथि और रावण दहन का शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, दशहरा या विजयादशमी आश्विन […]
क्या सांख्य योग और कर्म योग के फल अलग-अलग हैं?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 4 सांख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पण्डिताः । एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ॥४॥ अर्थात भगवान कहते हैं, सांख्य योग और कर्म योग को भिन्न फल देने वाला कहने वाले ज्ञानी नहीं, अज्ञानी लोग हैं, क्योंकि जो व्यक्ति इन दोनों में से किसी एक साधन में पारंगत है, वह दोनों के फलस्वरूप परमात्मा […]
Sarv Pitru Amavasya 2025 : तिथि पूजा विधि और महत्व

Sarv Pitru Amavasya 2025 : तिथि पूजा विधि और महत्व सर्वपितृ अमावस्या हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और इसे उन सभी पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए समर्पित माना जाता है। जो लोग अपने पितरों की पुण्यतिथि नहीं जानते, वे […]
कर्मयोगी और संन्यासी में क्या अंतर है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 3 ज्ञेयः स नित्यसंन्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति । निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते ॥३॥ भगवान ने कहा हे महाबाहो! जो पुरुष न तो किसी से द्वेष करता है और न किसी की इच्छा करता है, वह (कर्मयोगी) नित्य तपस्वी मानने योग्य है, क्योंकि जो पुरुष द्वन्द्वों से रहित […]
Pradosh Vrat 2025 : तिथि मुहूर्त महत्व और पूजा विधि

Pradosh Vrat 2025 : तिथि मुहूर्त महत्व और पूजा विधि हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। […]
भगवान श्रीकृष्ण ने संन्यास से ऊपर कर्मयोग को क्यों बताया?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 2 श्रीभगवानुवाच ।संन्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौ ।तयोस्तु कर्मसंन्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते ॥२॥ भगवान ने कहा – संन्यास (सांख्य योग) और कर्म योग – दोनों ही लाभकारी हैं। लेकिन दोनों में से कर्म योग, कर्म संन्यास (सांख्य योग) से बेहतर है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 2 Meaning in hindi क्या संन्यास से […]