कैसे समाप्त होते हैं हमारे राग-द्वेष और संशय? गीता देती है उत्तर

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 25

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 25 लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥२५॥ जिनके शरीर, मन, बुद्धि और इन्द्रियाँ वश में हैं, जो समस्त प्राणियों के कल्याण में तत्पर हैं, जिनके संशय दूर हो गए हैं, जिनके कल्मष नष्ट हो गए हैं, वे बुद्धिमान साधक निर्वाण अर्थात् ब्रह्म को प्राप्त करते हैं। Shrimad Bhagavad […]

Heart Chakra क्या है? इसका महत्व लक्षण मंत्र योग और ध्यान विधि

Heart Chakra Meditation

Heart Chakra क्या है? इसका महत्व लक्षण मंत्र योग और ध्यान विधि जानिए हृदय चक्र (Heart Chakra) के संतुलन के उपाय — इसका महत्व, लक्षण, मंत्र, योग आसन और ध्यान विधि। प्रेम, करुणा और एकता का केंद्र है हृदय चक्र। क्या है हृदय चक्र (Heart Chakra)? क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपके हृदय […]

Kaal Bhairav Jayanti 2025: तिथि महत्व पूजा विधि और कथा

Kaal Bhairav Jayanti 2025

Kaal Bhairav Jayanti 2025: तिथि महत्व पूजा विधि और कथा काल भैरव जयंती 2025 की तिथि, पूजा विधि, कथा और महत्व जानें। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप ‘महाकाल भैरव’ की आराधना का पर्व है। काल भैरव जयंती पर क्या करें, कौन से मंत्र जापें और कैसे पाएं भैरव बाबा की कृपा – जानें […]

Bhagavad Gita का रहस्य – क्या सच्चा सुख बाहर नहीं हमारे भीतर ही छिपा है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 24

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 24 योऽन्तः सुखोऽन्तरारामस्तथान्तज्र्योतिरेव यः ।स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ॥२४॥ जो व्यक्ति परमात्मा में ही प्रसन्न है, परमात्मा में ही रमण करता है, तथा परमात्मा में ही ज्ञानवान है, वह सांख्य योगी ब्रह्म में अपनी स्थिति का अनुभव करता हुआ निर्वाण ब्रह्म को प्राप्त होता है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 5 […]

भगवद् गीता में क्यों कहा गया है कि जो काम-क्रोध को सहन करता है वही योगी है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 23

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 23 ‘शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् । कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः ॥२३॥ जो मनुष्य इस मानव शरीर में काम और क्रोध से उत्पन्न होने वाले आवेगों को शरीर छोड़ने से पहले सहन करने में समर्थ है, वह मनुष्य योगी है और वह सुखी है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter […]

Bhagavad Gita- क्या हर आनंद के पीछे छिपा है दुख का बीज?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 22

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 22 ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते। आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ॥२२॥ अर्थात भगवान कहते हैं, क्योंकि, हे कुंतीनंदन! इंद्रियों और विषयों के मिलन से मिलने वाले सुख (आनंद) अस्थायी हैं और दुख का कारण हैं। इसलिए, एक बुद्धिमान व्यक्ति उनमें प्रसन्न नहीं होता। Shrimad Bhagavad Gita […]

Utpanna Ekadashi 2025 : तिथि पूजन विधि व्रत का महत्व और पारण समय

Utpanna Ekadashi 2025

Utpanna Ekadashi 2025 : तिथि पूजन विधि व्रत का महत्व और पारण समय हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष स्थान है। प्रत्येक महीने दो एकादशी आती हैं – एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। कुल मिलाकर वर्षभर में 24 एकादशी व्रत किए जाते हैं। इन्हीं में से मार्गशीर्ष मास के कृष्ण […]

गीता के अनुसार स्थायी सुख कहाँ मिलता है – बाहर या भीतर?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 21

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 21 बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम् । स ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नुते ॥२१॥ अर्थात बाहरी संपर्क से मुक्त हृदय वाला साधक आत्मा में मौजूद सुख को प्राप्त करता है। फिर, वह मनुष्य, अविभाज्य चेतना के साथ ब्रह्म में स्थित होकर, शाश्वत सुख का अनुभव करता है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 21 Meaning in […]

Guru Nanak Jayanti 2025 – गुरु नानक देव जी की जयंती 4 या 5 नवंबर को? जानें सही तारीख महत्व और मनाने की परंपराएं

Guru Nanak Jayanti 2025

Guru Nanak Jayanti 2025 – गुरु नानक देव जी की जयंती 4 या 5 नवंबर को? जानें सही तारीख महत्व और मनाने की परंपराएं Guru Nanak Jayanti 2025 कब है? जानिए गुरु नानक देव जी की जयंती की सही तारीख, इतिहास, उनके उपदेश, और कैसे मनाया जाता है गुरु पर्व। गुरु नानक जी के संदेश […]

Kartik Purnima 2025: कब है कार्तिक पूर्णिमा? जानें तिथि पूजन विधि देव दिवाली और धार्मिक महत्व

Kartik Purnima 2025

Kartik Purnima 2025: कब है कार्तिक पूर्णिमा? जानें तिथि पूजन विधि देव दिवाली और धार्मिक महत्व कार्तिक पूर्णिमा हिन्दू पंचांग के अनुसार साल का सबसे पवित्र और शुभ दिन माना जाता है। इसे देवताओं की दिवाली भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की विशेष पूजा की जाती है। […]

प्रिय-अप्रिय में समानता रखने वाला ही सच्चा योगी क्यों कहलाता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 20

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 20 न प्रहृष्येत्प्रियं प्राप्य नोद्विजेत्प्राप्य चाप्रियम् । स्थिरबुद्धिरसम्मूढो ब्रह्मविद् ब्रह्मणि स्थितः ॥२०॥ अर्थात भगवान कहते हैं, जो प्रिय के मिलने से खुश नहीं होता और अप्रिय के मिलने से परेशान नहीं होता, वह स्थिर बुद्धि वाला आदमी है। जो आदमी भ्रम से मुक्त है और ब्रह्म को जानता है, वह […]

Dev Uthani Ekadashi 2025 Vrat Katha – श्रीहरि के जागरण से जागेगा सोया हुआ भाग्य

Dev Uthani Ekadashi Vrat Katha

Dev Uthani Ekadashi 2025 Vrat Katha – श्रीहरि के जागरण से जागेगा सोया हुआ भाग्य देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi 2025) हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन धार्मिक रूप से अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने […]