दशहरा पर निबंध: Essay on Dussehra in Hindi [2025]

दशहरा भारत का प्रमुख त्यौहार है जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है। यह त्योहार अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है और हर साल बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दशहरा पर निबंध (100 शब्दों में) दशहरा भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है। […]
Indira Ekadashi Vrat Katha : इंदिरा एकादशी की संपूर्ण कथा और महत्व

Indira Ekadashi Vrat Katha : इंदिरा एकादशी की संपूर्ण कथा और महत्व हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को विशेष स्थान प्राप्त है। वर्षभर आने वाली 24 एकादशियों में से अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से पितृपक्ष में आता है, इसलिए इसका महत्व और […]
क्यों आज भी राम की रावण पर विजय हमारे जीवन में मायने रखती है

रामायण की कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ की कहानी नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू को छूती है। भगवान श्रीराम की रावण पर विजय अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। यह केवल हजारों साल पहले घटित हुई घटना नहीं है, बल्कि आज भी हमारे जीवन में प्रासंगिक है। बदलते समय, जटिल […]
भगवद गीता में संन्यास और कर्मयोग में कौन है श्रेष्ठ?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 1 अर्जुन उवाचसंन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् ।।१।। अर्जुन ने कहा – हे कृष्ण! आप कर्म के त्याग की, फिर कर्मयोग की प्रशंसा करते हैं। अतः इन दोनों साधनों में से जो निश्चित रूप से कल्याणकारी हो, उसे बताइए। Shrimad Bhagavad Gita Chapter […]
Karwa Chauth 2025 Date & Puja Vidhi – तिथि मुहूर्त पूजा विधि कथा और महत्व

Karwa Chauth 2025 Date & Puja Vidhi – तिथि मुहूर्त पूजा विधि कथा और महत्व करवा चौथ हिंदू धर्म का एक बेहद पावन और सुहावना व्रत है, जिसे हर साल सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना के लिए करती हैं। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की […]
गीता के अनुसार संशय को दूर करने का उपाय क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 42 तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः ।छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत ॥४२॥ अर्थात भगवान कहते हैं, अतः हे भारतवंशी अर्जुन! अपने हृदय में अज्ञान से उत्पन्न हुए इस संशय को ज्ञानरूपी तलवार से काटकर, योग (समता) में स्थित होकर और युद्ध के लिए उठ खडे हो जाव। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Verse […]
Surya Grahan 2025: साल का आखिरी सूर्य ग्रहण कब लगेगा और भारत पर इसका क्या प्रभाव होगा?

Surya Grahan 2025: साल का आखिरी सूर्य ग्रहण कब लगेगा और भारत पर इसका क्या प्रभाव होगा? साल 2025 खगोलीय दृष्टि से बेहद खास है क्योंकि इसमें कई महत्वपूर्ण ग्रहण लगने वाले हैं। इनमें से अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर 2025 को घटित होगा। यह ग्रहण खास इसलिए भी है क्योंकि उसी दिन सर्वपितृ अमावस्या […]
कर्मयोग में आत्मज्ञान और निष्काम भाव का क्या महत्व है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 41 योगसंन्यस्तकर्माणं ज्ञानसंछिन्नसंशयम् ।आत्मवन्तं न कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय ॥४१॥ अर्थात भगवान कहते हैं, हे धनंजय! जो योग (समता) के द्वारा सम्पूर्ण कर्मों से पृथक हो गया है और जिसका ज्ञान के द्वारा संशय नष्ट हो गया है, ऐसा स्वरूप पुरुष कर्मों से नहीं बंधता। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 4 Verse […]
भगवान राम को मर्यादा पुरूषोत्तम क्यों कहा जाता है?

भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहने वाले अनेक गुण हैं, लेकिन मुख्य 16 गुण जो उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहते हैं, वे इस प्रकार हैं: माता-पिता के आज्ञाकारी भगवान श्रीराम अपने बचपन से ही माता-पिता के आज्ञाकारी रहे। जब दशरथ जी ने उन्हें 14 वर्षों के वनवास का आदेश दिया, तो वे चाहें तो इंकार […]
Shardiya Navratri 2025 – तिथि घटस्थापना मुहूर्त और नियम

Shardiya Navratri 2025 – तिथि घटस्थापना मुहूर्त और नियम Shardiya Navratri 2025 का पर्व भारत में भक्ति और श्रद्धा का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस दौरान माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है। भक्त व्रत, साधना और भक्ति में लीन होकर माता रानी से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आइए जानते हैं […]
गीता के अनुसार संशयी व्यक्ति का क्या होता है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 40 अज्ञश्चाश्रद्धानश्च संशयात्मा विनश्यति । नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः ॥४०॥ अर्थात भगवान कहते हैं, जो व्यक्ति ज्ञान और श्रद्धा से रहित है, वह असफलता को प्राप्त होता है। ऐसे श्रद्धाहीन व्यक्ति के लिए न तो यह लोक है, न परलोक, और न ही सुख। Shrimad Bhagavad Gita […]
Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष में किस समय करें पितरों का तर्पण?

हर साल पितृ पक्ष (Pitru Paksha) का समय वह पावन अवसर होता है जब हम अपने पितरों को स्मरण करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पूजा-अर्चना करते हैं। Pitru Paksha 2025 कब है? वर्ष 2025 में पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से होगी और यह 15 दिनों तक […]