Author name: Kajal Makwana

नमस्कार दर्शकों मित्रो मेरा नाम Kajal Makwana है, में एक ब्लॉगर और यूट्यूबर हूं, तथा में आध्यात्मिकता (Spirituality) की श्रेणी में कंटेंट लिखती हूं और यूट्यूब पर विडियोज भी बनाती हूं। मुझे सनातन धर्म के बारे में जानना, आध्यात्मिकता को गहराई से समझना और हमारे हिन्दू धर्म के शास्त्रों जैसे रामायण, महाभारत, श्रीमद भगवद गीता, पुराण, तथा वेदों को पढ़ना बहुत पसंद है। मेरा लक्ष्य है कि मेरे लेखों और वीडियो के माध्यम से आपको (दर्शकों) सच्ची आध्यात्मिकता का अनुभव करा सकू, और हम सब के मन में ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत हो ऐसा कुछ कर सकू, तथा आध्यात्मिकता बढ़ने से समाज में शायद बुरे कर्म करने वाले कुछ समझे सके! और आने वाली पीढ़ी भी सनातन धर्म को गहराई से समझ सके। Follow me on: YouTube

Kawad Yatra 2025

Kawad Yatra 2025: कब शुरू होगी कांवड़ यात्रा? 10 या 11 जुलाई, जानिए सही तिथि और धार्मिक महत्व

हर वर्ष सावन माह में आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा शिवभक्तों की आस्था और भक्ति का अद्भुत उदाहरण होती है। […]

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Bhaum Pradosh Vrat 2025

Bhaum Pradosh Vrat 2025: कब है भौम प्रदोष व्रत—8 या 9 जुलाई? जानें सही तिथि और पूजा का समय

भौम प्रदोष व्रत (Bhaum Pradosh Vrat 2025) भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शुभ

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Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 16

क्या बिना ज़िम्मेदारी निभाए जीना बेकार है? जानिए गीता का नजरिया

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 16 एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह य: |अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति || 16 || अर्थात

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Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 14 15

क्या हमारे कर्म से होती है वर्षा? जानिए गीता के सृष्टि चक्र का रहस्य

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 14 15 अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भव: |यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञ: कर्मसमुद्भव: || 14 ||कर्म ब्रह्मोद्भवं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्भवम्

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Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 13

क्या केवल अपने लिए कर्म करना पाप है? श्रीकृष्ण का गूढ़ उत्तर

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 13 यज्ञशिष्टाशिन: सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषै: |भुञ्जते ते त्वघं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात् || 13 || अर्थात

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Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 12

क्या ईश्वर से मिली चीजे सिर्फ अपने लिए उपयोग करना पाप है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 12 इष्टान्भोगान्हि वो देवा दास्यन्ते यज्ञभाविता: |तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुङ्क्ते स्तेन एव स: || 12 ||

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Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 10 11

कैसे ब्रह्माजी के नियम से मिलता है जीवन का उद्देश्य?

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 10 11 सहयज्ञा: प्रजा: सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापति: |अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक् || 10 ||देवान्भावयतानेन ते देवा

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Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 9

क्या बिना स्वार्थ के काम करना आज भी जरूरी है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 9 यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धन: |तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसङ्ग: समाचर || 9 || अर्थात भगवान कहते

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Krishna image

क्या कर्म किए बिना जीवन संभव है? गीता का उत्तर क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 8 नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मण: | शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मण: ||

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Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 7

क्या मन से इन्द्रियों को वश में कर कर्म करना ही सच्चा योग है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 7 यस्त्विन्द्रियाणि मनसा नियम्यारभतेऽर्जुन |कर्मेन्द्रियै: कर्मयोगमसक्त: स विशिष्यते || 7 || अर्थात भगवान कहते हैं,

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Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 6

क्या केवल मन में भोग की कल्पना करना भी पाप है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 6 कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन् |इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचार: स उच्यते || 6 || अर्थात

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Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 5

क्या मनुष्य बिना कर्म के रह सकता है?

Bhagavad gita Chapter 3 Verse 5 न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् |कार्यते ह्यवश: कर्म सर्व: प्रकृतिजैर्गुणै: || 5 || अर्थात

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