क्या इच्छाओं का त्याग ही स्थिर बुद्धि की पहचान है?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 55 श्रीभगवानुवाच |प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् |आत्मन्येवात्मना तुष्ट: स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते || 55 || अर्थात श्री भगवान बोले, है पृथा नंदन जीस समय साधक मन में रही हुई सारी कामनाओं को अच्छे से त्याग कर देता है और खुद खुद से ही अपने आप में संतुष्ट रहता है, उस समय वह स्थिर […]
क्या आप स्थितप्रज्ञ हैं? जानिए भगवद गीता से स्थिर बुद्धि के लक्षण

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 54 अर्जुन उवाच |स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव |स्थितधी: किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम् || 54 || अर्थात अर्जुन बोले हे केशव! परमात्मा में स्थिति स्थिर बुद्धि वाले मनुष्य के क्या लक्षण होते हैं? वह स्थिर बुद्धि वाला मनुष्य किस तरह बोलता है? किस तरह बैठता है? और किस तरह […]
क्या योग का अर्थ है मतभेदों से ऊपर उठना?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 53 श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला |समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि || 53 || अर्थात भगवान कहते हैं, जिस समय शास्त्रीय मतभेदों से विचलित हुई तुम्हारी बुद्धि निश्चल हो जाएगी और परमात्मा में अचल हो जाएगी, उस समय तुम योग को प्राप्त हो जाओगे। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 53 Meaning […]
रिश्तों और चाहतों से मुक्त होकर क्या मिल सकती है सच्ची शांति?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 52 यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति |तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च || 52 || अर्थात भगवान कहते हैं जिस समय तुम्हारी बुद्धि मोह रूपी कदव से तर जायेगी, उस समय तूम सुना हुआ और सुनने में आने वाले भोगों से वैराग्य को प्राप्त कर लेगा। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 2 […]
जन्म-मरण के बंधन से कैसे मुक्त हों?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 51 कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिण: |जन्मबन्धविनिर्मुक्ता: पदं गच्छन्त्यनामयम् || 51 || अर्थात भगवान कहते हैं, समता युक्त मनुष्य साधको कर्म जन्य फलों का त्याग करके जन्म रूपी बंधन से मुक्त होकर निर्विकार पद को प्राप्त हो जाते हैं। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 51 Meaning in hindi […]
क्या समता ही कर्म-कुशलता है? गीता श्लोक 2/50 का महत्व

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 50 बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते | तस्माद्योगाय युज्यस्व योग: कर्मसु कौशलम् || 50 || अर्थात भगवान कहते हैं, बुद्धि समता से युक्त मनुष्य यहां जीवित अवस्था में ही पुण्य और पाप दोनों का त्याग कर देता है। इसीलिए तुम योग समता में जुड़ जाओ, क्योंकि योग ही कर्मों में कुशलता है। […]
आज के व्यस्त जीवन में समता का अभ्यास कैसे करें?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 49 दूरेण ह्यवरं कर्म बुद्धियोगाद्धनञ्जय |बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणा: फलहेतव: || 49 || अर्थात भगवान कहते हैं, बुद्धि योग समता की अपेक्षा से सकाम कर्म दर से अत्यंत ही निकृष्ट है, इसीलिए है धनंजय! तुम बुद्धि समता का आश्रय लो, क्योंकि फल का निमित बनने वाले अत्यंत दिन है। Shrimad Bhagavad […]
कर्म करते हुए कैसे पाएं शांति और समता?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 48 योगस्थ: कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय |सिद्ध्यसिद्ध्यो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते || 48 || अर्थात भगवान कहते हैं, हे धनंजय! तुम आसक्ति का त्याग करके सिद्धि और सिद्धि में समान रहकर योग में स्थिर होकर कर्मों करो, क्योंकि समस्त ही योग कहलाता है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 2 […]
कर्मण्येवाधिकारस्ते: क्या फल की इच्छा छोड़ना ही मोक्ष है?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 47 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन |मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि || 47 || अर्थात भगवान अर्जुन को कहते कहते हैं, कर्तव्य कर्म करने में ही तुम्हारा अधिकार है, फलों में कभी भी नहीं! इसीलिए तुम कर्म फल की इच्छा वाले भी ना बनो और तुम्हारी अकर्मनियता में भी आसकती न हो। […]
कैसे बनें जीवन में संतुलित और तनावमुक्त?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 46 यावानर्थ उदपाने सर्वत: सम्प्लुतोदके |तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानत: || 46 || अर्थात भगवान कहते हैं सब और से परिपूर्ण महान जलाशय के प्राप्त होने से छोटे जलाशय में मनुष्य को उतना प्रयोगजन रहता है अर्थात कुछ भी प्रयोजन नहीं रहता वेदो और शास्त्रों को तत्वों से जानने वाले ब्रह्म […]
भगवद्गीता में विरक्त जीवन का महत्व क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 45 त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन |निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान् || 45 || अर्थात भगवान कहते हैं, वेदों में तीनों गुणों के कार्य का ही वर्णन है, हे अर्जुन! तू तीनों गुणों से मुक्त हो जा, अनासक्त हो जा, नित्य सनातन में स्थित हो जा, योग के सुखों की भी इच्छा […]
महाभारत के वास्तविक स्थल जिन्हें आप आज भी देख सकते हैं।

प्राचीन भारत के सबसे महान महाकाव्यों में से एक महाभारत केवल युद्ध, धार्मिकता और ईश्वरीय मार्गदर्शन की कहानी नहीं है – यह वास्तविक भूगोल से गहराई से जुड़ा हुआ है। पूरे भारत और उसके बाहर, महाकाव्य की कालातीत घटनाओं से जुड़ी कई जगहें हैं, जहाँ पौराणिक कथाओं और इतिहास का सहज मिश्रण है। इन जगहों […]