क्या हम कर्ता हैं या प्रकृति का माध्यम?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 28

Bhagavad gita Chapter 3 Verse 28 तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयो: |गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते || 28 || अर्थात भगवान कहते हैं, हे महापुरुष! जो महापुरुष गुणों के विभाग को तथा कर्म के विभाग को उनके सार से जानता है, वह यह मानता है कि समस्त गुण गुणों में ही कार्य कर रहे हैं, […]

क्या हम सच में अपने कर्मों के कर्ता हैं?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 27

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 27 प्रकृते: क्रियमाणानि गुणै: कर्माणि सर्वश: |अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते || 27 || अर्थात भगवान कहते हैं,समस्त कर्म प्रकृति के गुणों द्वारा ही सम्पन्न होते हैं, किन्तु अहंकार से मोहित हुआ अज्ञानी मनुष्य यह मानता है कि ‘मैं ही कर्ता हूँ।’ shrimad Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 27 Meaning in Hindi […]

ज्ञानी व्यक्ति को कर्म करने की क्यों आवश्यकता है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 25 26

Bhagavad gita Chapter 3 Verse 25 26 सक्ता: कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत |कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसंग्रहम् || 25 ||न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङ्गिनाम् |जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्त: समाचरन् || 26 || अर्थात भगवान कहते हैं, हे भरतवंशोदभव अर्जुन! जिस प्रकार कर्म में आसक्त अज्ञानी पुरुष कर्म करते हैं, उसी प्रकार आसक्ति से रहित विद्वान पुरुष को भी लोगों को एकत्रित करने […]

भगवद गीता में भगवान श्री कृष्ण ने आलस्य के बारे में क्या कहा है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 23 24 यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रित: |मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्या: पार्थ सर्वश: || 23 ||उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम् |सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमा: प्रजा: || 24 || हे पार्थ! यदि मैं किसी समय सावधानी से काम न करूँ और अपना कर्तव्य न निभाऊँ (तो बड़ी हानि होगी, क्योंकि) […]

जब भगवान के लिए कोई कर्तव्य नही तो वे कर्म क्यों करते हैं?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 22

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 22 न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किंचन । नानवाप्तमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि ॥ २२॥ अर्थात भगवान कहते हैं, हे पार्थ! तीनों लोकों में मेरा न तो कोई कर्तव्य है और न ही कोई प्राप्त करने योग्य अप्राप्त वस्तु है, फिर भी मैं कर्तव्य और कर्म में लगा रहता […]

क्या श्रेष्ठ व्यक्ति के आचरण से ही समाज का मार्ग तय होता है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 21

Bhagavad gita Chapter 3 Verse 21 यद्यदाचरति स श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥२१॥ अर्थात भगवान कहते हैं, जो श्रेष्ठतम मनुष्य करता है, अन्य मनुष्य भी वैसा ही करते हैं। वह जो आदर्श निर्धारित करता है, अन्य मनुष्य भी उसी के अनुसार आचरण करते हैं। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 21 Meaning in […]

क्या निष्काम कर्म ही परमात्मा की प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 20

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 20 कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादय: |लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि || 20 || अर्थात भगवान कहते हैं, राजा जनक जैसे अनेक महापुरुषों ने कर्म के द्वारा परम सिद्धि प्राप्त की है। अतः तुम लोगों की भीड़ में भी निष्काम भाव से कर्म करने के योग्य हो। shrimad Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 20 […]

क्या बिना आसक्ति के किया गया काम हमें परमात्मा तक ले जा सकता है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 19

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 19 तस्मादसक्त: सततं कार्यं कर्म समाचर |असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुष: || 19 || अर्थात भगवान कहते हैं, अतः तुम्हें सदैव आसक्ति से मुक्त होकर अपने कर्तव्यों का भली-भाँति पालन करना चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति आसक्ति से रहित होकर अपने कर्तव्यों का पालन करता है, वह परमात्मा को प्राप्त होता है। […]

क्या सच्चे कर्मयोगी को कोई कर्तव्य निभाने की आवश्यकता होती है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 18

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 18 नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन |न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रय: || 18 || अर्थात भगवान कहते हैं, उस महापुरुष (जिसने कर्मयोग प्राप्त कर लिया है) का इस संसार में न तो कर्म करने से, न कर्म न करने से कोई प्रयोजन रहता है और न ही उसका किसी भी प्राणी […]

जो व्यक्ति खुद में पूर्ण है, क्या उसे समाज की अपेक्षाओं की परवाह करनी चाहिए?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 17

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 17 यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानव: |आत्मन्येव च सन्तुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते || 17 || अर्थात भगवान कहते हैं, जो व्यक्ति स्वयं से संतुष्ट है और अपने आप में संतुष्ट है, उसका कोई कर्तव्य नहीं है। shrimad Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 17 Meaning in Hindi क्या सच्चा सुख संसार में नहीं, […]

Kawad Yatra 2025: कब शुरू होगी कांवड़ यात्रा? 10 या 11 जुलाई, जानिए सही तिथि और धार्मिक महत्व

Kawad Yatra 2025

हर वर्ष सावन माह में आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा शिवभक्तों की आस्था और भक्ति का अद्भुत उदाहरण होती है। लाखों कांवड़िये गंगाजल लाकर अपने नजदीकी शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। 2025 में कांवड़ यात्रा की शुरुआत को लेकर भक्तों के बीच सवाल है कि यह यात्रा 10 जुलाई को शुरू होगी […]

Bhaum Pradosh Vrat 2025: कब है भौम प्रदोष व्रत—8 या 9 जुलाई? जानें सही तिथि और पूजा का समय

Bhaum Pradosh Vrat 2025

भौम प्रदोष व्रत (Bhaum Pradosh Vrat 2025) भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। यह व्रत मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष तिथि को रखा जाता है, और इस बार इसे लेकर तिथि को लेकर संशय है — क्या व्रत 8 जुलाई को होगा या 9 […]