क्या बिना ज़िम्मेदारी निभाए जीना बेकार है? जानिए गीता का नजरिया

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 16 एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह य: |अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति || 16 || अर्थात भगवान कहते हैं, हे पार्थ! जो मनुष्य इस संसार में परम्परागत रूप से प्रचलित सृष्टि चक्र का पालन नहीं करता, वह जो अपनी इन्द्रियों के द्वारा संसार के सुखों का भोग करता है, जो अधूरा […]
क्या हमारे कर्म से होती है वर्षा? जानिए गीता के सृष्टि चक्र का रहस्य

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 14 15 अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भव: |यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञ: कर्मसमुद्भव: || 14 ||कर्म ब्रह्मोद्भवं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्भवम् |तस्मात्सर्वगतं ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम् || 15 || अर्थात भगवान कहते हैं, सभी प्राणी अन्न से उत्पन्न होते हैं। अन्न वर्षा से उत्पन्न होता है। वर्षा यज्ञ से उत्पन्न होती है। यज्ञ कर्म से पूर्ण […]
क्या केवल अपने लिए कर्म करना पाप है? श्रीकृष्ण का गूढ़ उत्तर

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 13 यज्ञशिष्टाशिन: सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषै: |भुञ्जते ते त्वघं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात् || 13 || अर्थात भगवान कहते हैं, यज्ञ शेष योग का अनुभव करने वाले श्रेष्ठ मनुष्य सारे पापों से मुक्त हो जाते हैं परंतु जो केवल अपने लिए ही रसोइया करते है, अर्थात सारे कर्म करता है, वह पापी […]
क्या ईश्वर से मिली चीजे सिर्फ अपने लिए उपयोग करना पाप है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 12 इष्टान्भोगान्हि वो देवा दास्यन्ते यज्ञभाविता: |तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुङ्क्ते स्तेन एव स: || 12 || अर्थात भगवान कहते हैं, यज्ञशक्ति से युक्त देवता भी तुम लोगों को (बिना मांगे) ही तुम्हारे कर्तव्य पालन के लिए आवश्यक सामग्री देते रहेंगे। इस प्रकार जो मनुष्य उन देवताओं से प्राप्त सामग्री को दूसरों […]
कैसे ब्रह्माजी के नियम से मिलता है जीवन का उद्देश्य?

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 10 11 सहयज्ञा: प्रजा: सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापति: |अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक् || 10 ||देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु व: |परस्परं भावयन्त: श्रेय: परमवाप्स्यथ || 11 || अर्थात भगवान कहते हैं, सृष्टि के आरम्भ में भगवान ब्रह्मा ने मनुष्यों आदि को कर्तव्य-नियमों द्वारा उत्पन्न किया और उनसे (मुख्यतः मनुष्यों से) कहा कि तुम […]
क्या बिना स्वार्थ के काम करना आज भी जरूरी है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 9 यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धन: |तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसङ्ग: समाचर || 9 || अर्थात भगवान कहते हैं, यह मनुष्य समुदाय (अपने हित के लिए) दूसरे के कर्मों में लगा हुआ, उस यज्ञ के लिए किए गए कर्मों से बंधा हुआ है। इसलिए, हे कुन्तीनन्दन! तुम आसक्ति से रहित होकर उस यज्ञ […]
क्या कर्म किए बिना जीवन संभव है? गीता का उत्तर क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 8 नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मण: | शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मण: || 8 || अर्थात भगवान कहते हैं, शास्त्रों द्वारा निर्दिष्ट कर्तव्यों का पालन करो, क्योंकि कुछ न करने की अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है और कर्म न करने से तुम्हारा शारीरिक निर्वाह भी नहीं हो सकेगा। […]
क्या मन से इन्द्रियों को वश में कर कर्म करना ही सच्चा योग है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 7 यस्त्विन्द्रियाणि मनसा नियम्यारभतेऽर्जुन |कर्मेन्द्रियै: कर्मयोगमसक्त: स विशिष्यते || 7 || अर्थात भगवान कहते हैं, हे अर्जुन! जो पुरुष मन से इन्द्रियों को वश में करता है और आसक्ति से रहित होकर (शुद्ध भाव से) समस्त इन्द्रियों से कर्मयोग का अभ्यास करता है, वह श्रेष्ठ है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter […]
क्या केवल मन में भोग की कल्पना करना भी पाप है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 6 कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन् |इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचार: स उच्यते || 6 || अर्थात भगवान कहते हैं, जो मूढ़ बुद्धि वाला मनुष्य कर्मेन्द्रियों (समस्त इन्द्रियों) को बलपूर्वक रोककर मन से इन्द्रियों के विषयों का चिन्तन करता रहता है, उसे मिथ्याचारी (झूठ का आचरण करने वाला) कहा जाता है। shrimad […]
क्या मनुष्य बिना कर्म के रह सकता है?

Bhagavad gita Chapter 3 Verse 5 न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् |कार्यते ह्यवश: कर्म सर्व: प्रकृतिजैर्गुणै: || 5 || अर्थात भगवान कहते हैं, कोई भी मनुष्य किसी भी अवस्था में एक क्षण भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता, क्योंकि प्रकृति से उत्पन्न गुण ही उसके अधीन सभी प्राणियों द्वारा किए जाते हैं। Shrimad Bhagavad […]
क्या कर्म किए बिना निष्कर्मता और सिद्धि संभव है?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 4 न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते |न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति || 4 || अर्थात भगवान कहते हैं, मनुष्य न तो कर्म आरंभ किए बिना निष्कर्मता को प्राप्त होता है, न ही कर्मों का त्याग करने मात्र से सिद्धि को प्राप्त होता है। shrimad Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 4 Meaning in […]
Sawan 2025 Start Date: कब है सावन का पहला सोमवार, जानें डेट और महत्व

सावन मास (Sawan 2025) भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन महीनों में से एक है। इस पूरे माह में श्रद्धालु सावन सोमवार व्रत, कांवड़ यात्रा, और रुद्राभिषेक के माध्यम से शिव की उपासना करते हैं। 2025 में सावन मास का आरंभ 11 जुलाई 2025, गुरुवार से होगा, और पहला सावन सोमवार व्रत 14 जुलाई 2025 […]