Author name: Kajal Makwana

नमस्कार दर्शकों मित्रो मेरा नाम Kajal Makwana है, में एक ब्लॉगर और यूट्यूबर हूं, तथा में आध्यात्मिकता (Spirituality) की श्रेणी में कंटेंट लिखती हूं और यूट्यूब पर विडियोज भी बनाती हूं। मुझे सनातन धर्म के बारे में जानना, आध्यात्मिकता को गहराई से समझना और हमारे हिन्दू धर्म के शास्त्रों जैसे रामायण, महाभारत, श्रीमद भगवद गीता, पुराण, तथा वेदों को पढ़ना बहुत पसंद है। मेरा लक्ष्य है कि मेरे लेखों और वीडियो के माध्यम से आपको (दर्शकों) सच्ची आध्यात्मिकता का अनुभव करा सकू, और हम सब के मन में ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत हो ऐसा कुछ कर सकू, तथा आध्यात्मिकता बढ़ने से समाज में शायद बुरे कर्म करने वाले कुछ समझे सके! और आने वाली पीढ़ी भी सनातन धर्म को गहराई से समझ सके। Follow me on: YouTube

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 18

कब कहा जाता है कि साधक वास्तव में योगी बन गया?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 18 यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते ।निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा ॥१८॥ जब शांत मन अपने स्वरूप

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 17

भगवद्गीता के अनुसार संतुलित जीवन से दुःख कैसे मिटते हैं?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 17 युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु । युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥१७॥ दुखों को नष्ट करने वाला

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 16

भगवद्गीता के अनुसार योग के लिए संतुलित जीवन क्यों ज़रूरी है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 16 नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः । न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन ॥१६॥ हे अर्जुन!

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 15

परम शांति और सामान्य शांति में क्या अंतर है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 15 युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी नियतमानसः ।शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति ॥१५॥ नियत मन वाला योगी मन को

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 14

ध्यान योग में ब्रह्मचर्य व्रत इतना आवश्यक क्यों है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 14 प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः । मनः संयम्य मच्चितो युक्त आसीत मत्परः ॥१४॥ अर्थात जो सचेत

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