क्या लोभ हमें अपनों की हत्या तक ले जा सकता है?
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 45 अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम् |यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यता: || 45 || अर्थात अर्जुन […]
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Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 45 अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम् |यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यता: || 45 || अर्थात अर्जुन […]
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दोषैरेतै: कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकै: |उत्साद्यन्ते जातिधर्मा: कुलधर्माश्च शाश्वता: || 43 ||उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन |नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम || 44|| Shrimad Bhagavad Geeta
क्या कुलधर्म और जातिधर्म का नाश मनुष्य को नरक की ओर ले जाता है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 42 सङ्करो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च |पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रिया: || 42 || Shrimad Bhagavad
गीता के अनुसार कुलधर्म का विनाश कैसे पितरों के विनाश का कारण बनता है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 41 अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रिय: |स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्कर: || 41 || Shrimad Bhagavad Gita
क्या अधर्म से उत्पन्न होता है वर्णसंकर? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 40 कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्मा: सनातना: |धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत || 40 || Shrimad Bhagavad Gita
क्या अर्जुन का भय केवल मृत्यु का था या धर्म के पतन का? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 38 39 यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतस: |कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् || 38 ||कथं न
क्या लोभ हमारे विवेक को नष्ट कर देता है? अर्जुन का गीता में गंभीर प्रश्न Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 36 37 निहत्य धार्तराष्ट्रान्न: का प्रीति: स्याज्जनार्दन |पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिन: || 36 ||तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान् |स्वजनं
धर्म Vs ममता: अर्जुन क्यों नहीं करना चाहते थे युद्ध? अध्याय 1 श्लोक 36-37 In Hindi Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 34 35 आचार्या: पितर: पुत्रास्तथैव च पितामहा: |मातुला: श्वशुरा: पौत्रा: श्याला: सम्बन्धिनस्तथा || 34 ||एतान्न
जब अपने ही विरोध में खड़े हों – अर्जुन की कहानी आज की कहानी क्यों है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 32 33 न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च |किं नो राज्येन गोविन्द
अर्जुन ने क्यों त्याग दिए विजय और सुख की कामना? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 31 निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव |न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे || 31 || Shrimad
कुरुक्षेत्र में अर्जुन को क्यों नहीं दिख रहा था युद्ध में कोई लाभ? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 28 29 30 अर्जुन उवाच |दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम् || 28 ||सीदन्ति मम गात्राणि
अर्जुन का युद्ध से पीछे हटना – भय या करुणा? क्या कहते हैं ये श्लोक? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 26 27 तत्रापश्यत्स्थितान् पार्थ: पितृ नथ पितामहान् |आचार्यान्मातुलान्भ्रातृ न्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा || 26||श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि |तान्समीक्ष्य स कौन्तेय:
क्या अर्जुन का युद्ध न करने का विचार धर्म विरुद्ध था? गीता क्या कहती है? Read Post »