Bhagavad Gita

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 7

मान-अपमान को समान भाव से कैसे स्वीकारें? गीता क्या सिखाती है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 7 जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः । शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥७॥ जिसने अपने आप पर विजय […]

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 6

क्या स्वयं को जीतना ही सच्ची आध्यात्मिक विजय है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 6 बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः ।अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत् ॥६॥ जिसने खुद को जीत लिया है,

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 5

क्या सच में इंसान स्वयं ही अपना मित्र और शत्रु होता है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 5 उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् । आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥५॥ खुद के ज़रिए खुद को बचाना।

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 4

क्या आसक्ति-मुक्त जीवन ही सच्चे योग की पहचान है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 4 यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते । सर्वसंकल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते ॥४॥ अर्थात भगवान कहते हैं, जिस

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 3

Bhagavad Gita – क्या निष्काम कर्म से ही योग मिलता है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 3 आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते । योगारूढस्य तस्यैव ‘शमः कारणमुच्यते ॥३॥ जो ध्यान करने वाला योगी

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 2

क्या हर रोज़ के तनाव से मुक्त होने का तरीका सिर्फ़ ‘आसक्ति त्याग’ है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 2 यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पाण्डव । न ह्यसंन्यस्तसंकल्पो योगी भवति कश्चन ॥२॥ हे

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 1

क्या कर्म करते हुए अनासक्त रहना ही संन्यास कहलाता है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 1 श्रीभगवानुवाचअनाश्रितः कर्मफलं कार्य कर्म करोति यः । स संन्यासी च योगी च न निरग्निर्न

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 29

गीता बताती है-ईश्वर ही मित्र रक्षक और हितैषी हैं-क्या हम मानते हैं?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 29 भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् ।सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥२९॥ भक्त मुझे समस्त यज्ञों और

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 27 28

Bhagavad Gita – क्या इच्छा भय और क्रोध से मुक्त होकर ही मिलता है सच्चा मोक्ष?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 27 28 स्पर्शान्कृत्वा बहिर्बाह्यांश्चक्षुश्चैवान्तरे भुवोः । प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ ॥२७॥यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 26

मन पर विजय पाकर ब्रह्मनिर्वाण कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 26 कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् । अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् ॥२६॥ जो सांख्य योगी वासना से

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 25

कैसे समाप्त होते हैं हमारे राग-द्वेष और संशय? गीता देती है उत्तर

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 25 लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥२५॥ जिनके शरीर, मन, बुद्धि और इन्द्रियाँ

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 24

Bhagavad Gita का रहस्य – क्या सच्चा सुख बाहर नहीं हमारे भीतर ही छिपा है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 24 योऽन्तः सुखोऽन्तरारामस्तथान्तज्र्योतिरेव यः ।स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ॥२४॥ जो व्यक्ति परमात्मा में ही प्रसन्न

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