Bhagavad Gita

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 23

भगवद् गीता में क्यों कहा गया है कि जो काम-क्रोध को सहन करता है वही योगी है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 23 ‘शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् । कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः ॥२३॥ जो […]

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 22

Bhagavad Gita- क्या हर आनंद के पीछे छिपा है दुख का बीज?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 22 ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते। आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ॥२२॥

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 21

गीता के अनुसार स्थायी सुख कहाँ मिलता है – बाहर या भीतर?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 21 बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम् । स ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नुते ॥२१॥ अर्थात बाहरी संपर्क से मुक्त हृदय वाला

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 20

प्रिय-अप्रिय में समानता रखने वाला ही सच्चा योगी क्यों कहलाता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 20 न प्रहृष्येत्प्रियं प्राप्य नोद्विजेत्प्राप्य चाप्रियम् । स्थिरबुद्धिरसम्मूढो ब्रह्मविद् ब्रह्मणि स्थितः ॥२०॥ अर्थात भगवान कहते

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 19

क्या समता से ही मन को दिव्यता का अनुभव होता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 19 इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः । निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 18

क्या सबमें समान परमात्मा को देखना ही सच्ची समता है? – श्रीकृष्ण की शिक्षा

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 18 विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि । शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः ॥१८॥ अर्थात भगवान

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 17

परमात्मा में स्थित साधक पुनर्जन्म से कैसे मुक्त होता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 17 तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः ।गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः ॥१७॥ जो साधक परमात्मा के प्रति समर्पित हैं, जिनकी बुद्धि प्रकाशित

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 16

अज्ञान दूर करने का एकमात्र उपाय क्या है? – श्रीकृष्ण का उत्तर

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 16 ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः ।तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ।।१६।। अर्थात भगवान कहते हैं, परन्तु

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 15

अगर भगवान सबके भीतर हैं तो फिर पाप-पुण्य से अलग कैसे हैं?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 15 नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं विभुः । अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः ।॥१५॥ अर्थात

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 14

कर्मों का कर्ता कौन है – मनुष्य या ईश्वर?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 14 न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः ।न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते ॥१४॥ अर्थात भगवान

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 13

कर्म न करते हुए भी सांख्य योगी कैसे सुखपूर्वक रहता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 13 सर्वकर्माणि मनसा संन्यस्यास्ते सुखं वशी । नवद्वारे पुरे देही नैव कुर्वन्न कारयन् ॥१३॥ अर्थात

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 12

निष्काम भाव से कर्म करने का रहस्य क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 12 युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम् ।अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते ॥१२॥ अर्थात भगवान कहते

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