
Apara Ekadashi Vrat Katha 2026
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। वर्ष भर आने वाली सभी एकादशियों में ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप की पूजा करने से मनुष्य के बड़े से बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं और उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
पुराणों में कहा गया है कि जो पुण्य तीर्थ स्नान, दान, यज्ञ और कठिन तपस्या से मिलता है, वही पुण्य केवल अपरा एकादशी का व्रत करने से प्राप्त हो जाता है। यही कारण है कि इस एकादशी को “पापों का नाश करने वाली एकादशी” कहा जाता है।
अपरा एकादशी क्या है?
अपरा एकादशी ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। “अपरा” का अर्थ होता है — अपार या असीम। यह व्रत अपार पुण्य और धन-संपत्ति देने वाला माना गया है। वहीं इसे “अचला” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से मनुष्य को अपने सभी पापों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया अपरा एकादशी का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है और उसका क्या महत्व है?
तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा—
यह एकादशी “अचला” और “अपरा” दोनों नामों से प्रसिद्ध है। यह व्रत करने वाले मनुष्य संसार में यश प्राप्त करते हैं और उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि इस दिन भगवान त्रिविक्रम की पूजा करने से ब्रह्म हत्या, दूसरों की निंदा, झूठ बोलना, झूठी गवाही देना, धोखा देना, अधर्म करना जैसे सभी पाप समाप्त हो जाते हैं।
अपरा एकादशी व्रत कथा
धर्मात्मा राजा महीध्वज और उसके भाई की कथा
प्राचीन समय में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा और न्यायप्रिय राजा था। उसका छोटा भाई वज्रध्वज अत्यंत क्रूर, अधर्मी और ईर्ष्यालु स्वभाव का था। वह अपने बड़े भाई से द्वेष रखता था।
एक दिन उसने अवसर पाकर रात के समय राजा महीध्वज की हत्या कर दी और उसके शरीर को जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया। अकाल मृत्यु होने के कारण राजा की आत्मा प्रेत योनि में भटकने लगी। वह उसी पीपल के पेड़ पर रहने लगा और वहां आने-जाने वालों को परेशान करने लगा।
ऋषि धौम्य ने दिलाई प्रेत योनि से मुक्ति
कुछ समय बाद धौम्य ऋषि उस मार्ग से गुजरे। उन्होंने अपने तपोबल से उस प्रेत की पूरी कथा जान ली। ऋषि ने दया भाव से उस आत्मा को प्रेत योनि से मुक्त कराने का निश्चय किया।
उन्होंने अपरा एकादशी का व्रत किया और व्रत का संपूर्ण पुण्य उस प्रेतात्मा को समर्पित कर दिया। अपरा एकादशी के प्रभाव से राजा महीध्वज को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई। वह दिव्य शरीर धारण कर पुष्पक विमान में बैठकर स्वर्ग लोक चला गया।
यह कथा दर्शाती है कि अपरा एकादशी का व्रत मनुष्य को बड़े से बड़े पाप और कष्टों से भी मुक्ति दिला सकता है।
अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में अपरा एकादशी का महत्व अत्यंत महान बताया गया है। कहा जाता है कि इस व्रत से मिलने वाला पुण्य अनेक तीर्थों, यज्ञों और दानों के बराबर होता है।
इस व्रत का फल निम्न पुण्यों के समान बताया गया है:
- कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर स्नान
- गंगा तट पर पिंडदान
- प्रयागराज में मकर संक्रांति स्नान
- महाशिवरात्रि व्रत
- बद्रीनाथ और केदारनाथ दर्शन
- सूर्यग्रहण में कुरुक्षेत्र स्नान
- स्वर्णदान और गौदान
इतना ही नहीं, जो लोग पापों के कारण मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हों, उनके लिए भी यह व्रत अत्यंत शुभ माना गया है।
अपरा एकादशी पूजा विधि
व्रत की तैयारी
- दशमी तिथि की रात से सात्विक भोजन करें।
- ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करें।
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा विधि
- घर के मंदिर में भगवान विष्णु या त्रिविक्रम स्वरूप की स्थापना करें।
- भगवान को पीले वस्त्र, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- विष्णु सहस्रनाम या गीता पाठ करें।
- रात में भजन-कीर्तन और जागरण करें।
पारण
द्वादशी तिथि में ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराने के बाद व्रत का पारण करें।
अपरा एकादशी के लाभ
पापों से मुक्ति
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से जीवन के गंभीर पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
पूर्वजों का आशीर्वाद
अपरा एकादशी करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष शांत होता है।
आर्थिक सुख-समृद्धि
यह व्रत धन, यश और सफलता प्रदान करने वाला माना गया है।
मानसिक शांति
भगवान विष्णु की कृपा से मन शांत होता है और नकारात्मकता दूर होती है।
मोक्ष की प्राप्ति
सच्चे मन से किया गया यह व्रत मनुष्य को विष्णु लोक तक पहुंचाने वाला माना गया है।
अपरा एकादशी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
- इस दिन क्रोध, झूठ और अपशब्दों से दूर रहें।
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का त्याग करें।
- जरूरतमंदों को दान अवश्य दें।
- तुलसी पूजा और विष्णु नाम स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
अपरा एकादशी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और पापों से मुक्ति का दिव्य अवसर है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए यह एक अत्यंत प्रभावशाली और पुण्यदायी व्रत माना जाता है। पुराणों में वर्णित इसकी कथा हमें यह सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से किए गए व्रत से जीवन के बड़े से बड़े कष्ट दूर हो सकते हैं।
यदि श्रद्धापूर्वक अपरा एकादशी का पालन किया जाए, तो व्यक्ति को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।
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