Vivah Panchami 2025: मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए करें ये चमत्कारी उपाय – सियाराम का विशेष आशीर्वाद

Vivah Panchami 2025

Vivah Panchami 2025: मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए करें ये चमत्कारी उपाय – सियाराम का विशेष आशीर्वाद विवाह पंचमी वह पवित्र तिथि है जब भगवान श्रीराम और माता सीता का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। हिंदू सनातन संस्कृति में यह दिन दांपत्य सुख, प्रेम, सामंजस्य और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता […]

गीता बताती है-ईश्वर ही मित्र रक्षक और हितैषी हैं-क्या हम मानते हैं?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 29

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 29 भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् ।सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥२९॥ भक्त मुझे समस्त यज्ञों और तपों का भोक्ता, समस्त मनुष्यों का महान ईश्वर तथा समस्त प्राणियों का सुहृदं (निःस्वार्थ, दयालु और प्रेममय) जानकर शांति प्राप्त करता है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 29 Meaning in hindi क्या सभी अच्छे […]

Visualization Meditation क्या है? इसके फायदे और 3 शक्तिशाली टेकनीक

Visualization Meditation

Visualization Meditation क्या है? इसके फायदे और 3 शक्तिशाली टेकनीक क्या आप मन की शांति, आत्मविश्वास और मानसिक ऊर्जा को बढ़ाना चाहते हैं?तो Visualization Meditation यानी कल्पनात्मक ध्यान आपके लिए एक बेहद शक्तिशाली आध्यात्मिक तकनीक साबित हो सकती है। यह ध्यान सिर्फ मन को शांत नहीं करता, बल्कि आपकी कल्पनाशक्ति, लक्ष्य-साधना और भावनात्मक संतुलन — […]

Bhagavad Gita – क्या इच्छा भय और क्रोध से मुक्त होकर ही मिलता है सच्चा मोक्ष?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 27 28

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 27 28 स्पर्शान्कृत्वा बहिर्बाह्यांश्चक्षुश्चैवान्तरे भुवोः । प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ ॥२७॥यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः ॥२८॥ अर्थात भगवान कहते हैं, बाह्य विषयों को बाहर ही छोड़कर, दोनों भ्रामरी के बीच में दृष्टि को स्थिर करके, तथा नासिका में श्वास और निःश्वास वायु को संतुलित करके, जिसकी इन्द्रियाँ, मन […]

मन पर विजय पाकर ब्रह्मनिर्वाण कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 26

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 26 कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् । अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् ॥२६॥ जो सांख्य योगी वासना से पूर्णतया मुक्त हैं, जिन्होंने मन पर विजय प्राप्त कर ली है, तथा जिन्होंने अपने स्वरूप का साक्षात्कार कर लिया है, उनके लिए निर्वाण पूर्ण है, शरीर में रहते हुए भी तथा शरीर छोड़ने के बाद […]

Utpanna Ekadashi Katha 2025: मुर दैत्य वध की दिव्य कथा

Utpanna Ekadashi Vrat Katha 2025

Utpanna Ekadashi Katha 2025: मुर दैत्य वध की दिव्य कथा उत्पन्ना एकादशी 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, कथा, महत्व, व्रत विधि और भगवान विष्णु की योगमाया देवी के प्राकट्य की दिव्य कथा जानें। यह एकादशी सभी पापों का नाश करती है और मोक्ष प्रदान करती है। उत्पन्ना एकादशी क्या है? हिंदू धर्म में एकादशी व्रत […]

कैसे समाप्त होते हैं हमारे राग-द्वेष और संशय? गीता देती है उत्तर

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 25

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 25 लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥२५॥ जिनके शरीर, मन, बुद्धि और इन्द्रियाँ वश में हैं, जो समस्त प्राणियों के कल्याण में तत्पर हैं, जिनके संशय दूर हो गए हैं, जिनके कल्मष नष्ट हो गए हैं, वे बुद्धिमान साधक निर्वाण अर्थात् ब्रह्म को प्राप्त करते हैं। Shrimad Bhagavad […]

Heart Chakra क्या है? इसका महत्व लक्षण मंत्र योग और ध्यान विधि

Heart Chakra Meditation

Heart Chakra क्या है? इसका महत्व लक्षण मंत्र योग और ध्यान विधि जानिए हृदय चक्र (Heart Chakra) के संतुलन के उपाय — इसका महत्व, लक्षण, मंत्र, योग आसन और ध्यान विधि। प्रेम, करुणा और एकता का केंद्र है हृदय चक्र। क्या है हृदय चक्र (Heart Chakra)? क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपके हृदय […]

Kaal Bhairav Jayanti 2025: तिथि महत्व पूजा विधि और कथा

Kaal Bhairav Jayanti 2025

Kaal Bhairav Jayanti 2025: तिथि महत्व पूजा विधि और कथा काल भैरव जयंती 2025 की तिथि, पूजा विधि, कथा और महत्व जानें। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप ‘महाकाल भैरव’ की आराधना का पर्व है। काल भैरव जयंती पर क्या करें, कौन से मंत्र जापें और कैसे पाएं भैरव बाबा की कृपा – जानें […]

Bhagavad Gita का रहस्य – क्या सच्चा सुख बाहर नहीं हमारे भीतर ही छिपा है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 24

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 24 योऽन्तः सुखोऽन्तरारामस्तथान्तज्र्योतिरेव यः ।स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ॥२४॥ जो व्यक्ति परमात्मा में ही प्रसन्न है, परमात्मा में ही रमण करता है, तथा परमात्मा में ही ज्ञानवान है, वह सांख्य योगी ब्रह्म में अपनी स्थिति का अनुभव करता हुआ निर्वाण ब्रह्म को प्राप्त होता है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter 5 […]

भगवद् गीता में क्यों कहा गया है कि जो काम-क्रोध को सहन करता है वही योगी है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 23

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 23 ‘शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् । कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः ॥२३॥ जो मनुष्य इस मानव शरीर में काम और क्रोध से उत्पन्न होने वाले आवेगों को शरीर छोड़ने से पहले सहन करने में समर्थ है, वह मनुष्य योगी है और वह सुखी है। Shrimad Bhagavad Gita Chapter […]

Bhagavad Gita- क्या हर आनंद के पीछे छिपा है दुख का बीज?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 22

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 22 ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते। आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ॥२२॥ अर्थात भगवान कहते हैं, क्योंकि, हे कुंतीनंदन! इंद्रियों और विषयों के मिलन से मिलने वाले सुख (आनंद) अस्थायी हैं और दुख का कारण हैं। इसलिए, एक बुद्धिमान व्यक्ति उनमें प्रसन्न नहीं होता। Shrimad Bhagavad Gita […]