Author name: Kajal Makwana

नमस्कार दर्शकों मित्रो मेरा नाम Kajal Makwana है, में एक ब्लॉगर और यूट्यूबर हूं, तथा में आध्यात्मिकता (Spirituality) की श्रेणी में कंटेंट लिखती हूं और यूट्यूब पर विडियोज भी बनाती हूं। मुझे सनातन धर्म के बारे में जानना, आध्यात्मिकता को गहराई से समझना और हमारे हिन्दू धर्म के शास्त्रों जैसे रामायण, महाभारत, श्रीमद भगवद गीता, पुराण, तथा वेदों को पढ़ना बहुत पसंद है। मेरा लक्ष्य है कि मेरे लेखों और वीडियो के माध्यम से आपको (दर्शकों) सच्ची आध्यात्मिकता का अनुभव करा सकू, और हम सब के मन में ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत हो ऐसा कुछ कर सकू, तथा आध्यात्मिकता बढ़ने से समाज में शायद बुरे कर्म करने वाले कुछ समझे सके! और आने वाली पीढ़ी भी सनातन धर्म को गहराई से समझ सके। Follow me on: YouTube

Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 41

क्या अधर्म से उत्पन्न होता है वर्णसंकर?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 41 अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रिय: |स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्कर: || 41 || Shrimad Bhagavad Gita […]

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Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 40

क्या अर्जुन का भय केवल मृत्यु का था या धर्म के पतन का?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 40 कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्मा: सनातना: |धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत || 40 || Shrimad Bhagavad Gita

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Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 38 39

क्या लोभ हमारे विवेक को नष्ट कर देता है? अर्जुन का गीता में गंभीर प्रश्न

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 38 39 यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतस: |कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् || 38 ||कथं न

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Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 36 37

धर्म Vs ममता: अर्जुन क्यों नहीं करना चाहते थे युद्ध? अध्याय 1 श्लोक 36-37 In Hindi

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 36 37 निहत्य धार्तराष्ट्रान्न: का प्रीति: स्याज्जनार्दन |पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिन: || 36 ||तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान् |स्वजनं

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Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 34 35

जब अपने ही विरोध में खड़े हों – अर्जुन की कहानी आज की कहानी क्यों है?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 34 35 आचार्या: पितर: पुत्रास्तथैव च पितामहा: |मातुला: श्वशुरा: पौत्रा: श्याला: सम्बन्धिनस्तथा || 34 ||एतान्न

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Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 31

कुरुक्षेत्र में अर्जुन को क्यों नहीं दिख रहा था युद्ध में कोई लाभ?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 31 निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव |न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे || 31 || Shrimad

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Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 28 29 30

अर्जुन का युद्ध से पीछे हटना – भय या करुणा? क्या कहते हैं ये श्लोक?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 28 29 30 अर्जुन उवाच |दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम् || 28 ||सीदन्ति मम गात्राणि

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Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 26 27

क्या अर्जुन का युद्ध न करने का विचार धर्म विरुद्ध था? गीता क्या कहती है?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 26 27 तत्रापश्यत्स्थितान् पार्थ: पितृ नथ पितामहान् |आचार्यान्मातुलान्भ्रातृ न्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा || 26||श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि |तान्समीक्ष्य स कौन्तेय:

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Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 24 25

अर्जुन का मोह जागृत करने के पीछे भगवान श्री कृष्ण का क्या उद्देश्य था?

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 24 25 सञ्जय उवाच |एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत |सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम् || 24 ||भीष्मद्रोणप्रमुखत: सर्वेषां

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Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 23

अर्जुन ने दुर्योधन को ‘दुर्बुद्धि’ क्यों कहा? भगवद गीता के इस रहस्य को जानें!

Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 23 योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागता: |धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षव: || 23 || Shrimad Bhagavad Gita Chapter

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Bhagavad Gita Chapter 1 Shloka 21 22

भगवद गीता में अर्जुन के युद्ध से पहले के विचार क्या थे?

अर्जुन उवाच |सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत || 21|| यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान् |कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे || 22|| Bhagavad Geeta Chapter 1

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