Bhagava Gita Chapter 4 Verse 18

कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म देखने का रहस्य क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 18 कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः । स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत् ॥१८॥ अर्थात […]

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Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 17

कर्म अकर्म और विकर्म का असली अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 17 कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः । अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः ॥१७॥ अर्थात

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Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 16

कर्म और अकर्म में अंतर क्या है? गीता का रहस्य

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 16 किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः । तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥१६॥ अर्थात भगवान

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Krishna Janmashtami 2025: 15 या 16 अगस्त, कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी?

Krishna Janmashtami 2025: 15 या 16 अगस्त, कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक पवित्र और आनंदमय पर्व है, जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया

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Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 15

क्या मोक्ष प्राप्त होने पर भी कर्तव्य-कर्म करना आवश्यक है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 15 एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः । कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् ।।१५।।

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Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 13 14

क्या भगवान सृष्टि के कर्ता होते हुए भी अकर्ता हैं?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 13 14 चातुर्वर्ण्य मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः । तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम् ॥१३॥न मां कर्माणि लिम्पन्ति

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Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 12

क्या देवताओं की पूजा से मिलने वाला कर्मफल स्थायी होता है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 12 काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः । क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा ॥१२॥

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Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 11

क्या भगवान हर भक्त को उसके भाव के अनुसार स्वीकार करते हैं?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 11 ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् । मम वर्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥११॥ अर्थात

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Bhagavad Gita Chapter 4 Verese 10

राग भय और क्रोध से मुक्त होकर ईश्वर को कैसे पाया जा सकता है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 10 वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः ।बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः ।।१०।। अर्थात भगवान कहते हैं, राग भय

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Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 9

भगवान के दिव्य जन्म और कर्म को जानने से क्या होता है?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 9 जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः । त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति

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Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 8

क्या भगवान हर युग में अवतार लेते हैं धर्म की स्थापना के लिए?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 8 परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ॥ ८॥ अर्थात भगवान

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Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 7

भगवान कब लेते हैं अवतार? जानिए गीता का रहस्य, अध्याय 4 श्लोक 7

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 7 यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ ७॥ अर्थात भगवान

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