
Parshuram Janmotsav Special
भगवान परशुराम हिन्दू धर्म के अत्यंत तेजस्वी, पराक्रमी और चिरंजीवी अवतारों में से एक माने जाते हैं। वे किसी एक समाज के नहीं, बल्कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज के आदर्श हैं। शास्त्रों के अनुसार वे आज भी जीवित हैं और कलियुग के अंत तक तपस्या करते रहेंगे।
उन्हें भगवान विष्णु का छठा ‘आवेश अवतार’ माना जाता है, जिन्होंने पृथ्वी पर धर्म की रक्षा के लिए जन्म लिया।
भगवान परशुराम का जन्म कब हुआ था?
धार्मिक ग्रंथों और विद्वानों के अनुसार:
- भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (अक्षय तृतीया) को हुआ था।
- इस दिन को परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है।
- जन्म का समय रात्रि का प्रथम प्रहर माना जाता है।
- उनका जन्म सतयुग और त्रेतायुग के संधिकाल में हुआ था।
शोध के अनुसार:
उनका जन्म लगभग 5142 ईसा पूर्व माना जाता है।
वहीं भगवान श्रीराम का जन्म 5114 ईसा पूर्व बताया गया है, जिससे स्पष्ट है कि परशुराम, राम से पूर्व अवतरित हुए थे।
विशेष मान्यता:
कहा जाता है कि उनके जन्म के समय छह उच्च ग्रहों का योग बना था, जिससे वे अत्यंत तेजस्वी, ओजस्वी और पराक्रमी बने।
भगवान परशुराम का जन्म स्थान (प्रमुख मान्यताएं)
भगवान परशुराम के जन्मस्थान को लेकर भारत में कई मान्यताएं प्रचलित हैं:
1. खैराडीह, बलिया (उत्तर प्रदेश)
- शोधकर्ता शिवकुमार सिंह कौशिकेय के अनुसार यह प्रमुख जन्मस्थान माना जाता है।
- यहां की पुरातात्विक खुदाई में 900 ईसा पूर्व के समृद्ध नगर के प्रमाण मिले हैं।
- यह स्थान प्राचीन भृगुक्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है।
2. जानापाव, मध्यप्रदेश
- जानापाव को भी परशुराम जन्मस्थली माना जाता है।
- यहां उनके पिता ऋषि जमदग्नि का आश्रम था।
- यहां से कई पवित्र नदियां निकलती हैं, जो आगे जाकर गंगा और नर्मदा में मिलती हैं।
- हर वर्ष यहां मेला भी आयोजित होता है।
3. कलचा गांव, सरगुजा (छत्तीसगढ़)
- यहां स्थित शतमहला पुरातात्विक स्थल को जन्मस्थान माना जाता है।
- यह क्षेत्र प्राचीन दंडकारण्य का हिस्सा माना जाता है।
- यहां ऋषि-मुनियों से जुड़े अनेक अवशेष प्राप्त हुए हैं।
4. जलालाबाद, शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश)
- यहां स्थित जमदग्नि आश्रम को भी जन्मस्थली माना जाता है।
- माता माता रेणुका से जुड़े मंदिर और प्राचीन अवशेष यहां मौजूद हैं।
- ‘ढकियाइन देवी मंदिर’ को रेणुका जी की कुटी का स्थान माना जाता है।
भगवान परशुराम के जीवन की प्रमुख घटनाएं
गणेश जी के साथ प्रसंग
सतयुग में एक बार भगवान गणेश ने उन्हें भगवान शिव के दर्शन से रोका। इससे क्रोधित होकर परशुराम ने परशु से प्रहार किया, जिससे गणेश जी का एक दांत टूट गया और वे एकदंत कहलाए।
रामायण काल
- राजा जनक और राजा दशरथ का सम्मान किया
- सीता स्वयंवर में भगवान राम का अभिनंदन किया
महाभारत काल
- भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किया
- कर्ण को श्राप दिया
- भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण को शस्त्र विद्या सिखाई
चिरंजीवी परशुराम और उनका तप स्थान
- भगवान परशुराम को चिरंजीवी माना जाता है
- उनका तप स्थान महेंद्रगिरि पर्वत माना जाता है
- मान्यता है कि वे कल्प के अंत तक यहीं तपस्या करते रहेंगे
भगवान परशुराम केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म, तप और न्याय के प्रतीक हैं। उनका जन्म अक्षय तृतीया जैसे पवित्र दिन पर हुआ, जो आज भी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी जन्मभूमि को लेकर भले ही विभिन्न मान्यताएं हों, लेकिन उनके आदर्श, पराक्रम और धर्म के प्रति समर्पण हर युग में प्रेरणादायक रहेंगे।
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FAQs
भगवान परशुराम का जन्म कब हुआ था?
भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ माना जाता है।
परशुराम जयंती 2026 में कब है?
साल 2026 में परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी
भगवान परशुराम किसके अवतार हैं?
भगवान परशुराम, भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं।
परशुराम जयंती क्यों मनाई जाती है?
यह दिन भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और उनके पराक्रम व धर्म रक्षा के कार्यों को याद किया जाता है।









