
Utpanna Ekadashi Katha 2025: मुर दैत्य वध की दिव्य कथा
उत्पन्ना एकादशी 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, कथा, महत्व, व्रत विधि और भगवान विष्णु की योगमाया देवी के प्राकट्य की दिव्य कथा जानें। यह एकादशी सभी पापों का नाश करती है और मोक्ष प्रदान करती है।
उत्पन्ना एकादशी क्या है?
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत विशेष स्थान है। हालांकि वर्ष में चौबीस एकादशियाँ आती हैं, लेकिन उत्पन्ना एकादशी को पहली और मूल एकादशी कहा गया है। मान्यता है कि इसी दिन देवी एकादशी का अवतरण हुआ था। यह तिथि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है।
उत्पन्ना एकादशी का व्रत करने से:
- पापों का नाश होता है
- जीवन में शांति और समृद्धि आती है
- मन व शरीर की शुद्धि होती है
- मोक्ष की प्राप्ति होती है
उत्पन्ना एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि उत्पन्ना एकादशी व्रत करने से मानव अपने जीवन में:
- नकारात्मक ऊर्जा
- दुर्भाग्य
- पाप कर्म
- मानसिक तनाव
- जीवन की बाधाएँ
इन सभी से मुक्ति पा लेता है। इस व्रत का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पूरे परिवार में सुख-शांति फैलाता है।
उत्पन्ना एकादशी कथा: मुर दैत्य के वध की अलौकिक कहानी
सत्ययुग में मुर दैत्य नाम का अत्यंत शक्तिशाली असुर था।
उसकी शक्ति इतनी अधिक थी कि:
उसने इंद्र सहित कई देवताओं को पराजित कर दिया, इंद्रलोक पर अधिकार जमा लिया त्रिलोक में भय का वातावरण फैल गया देवता भगवान शिव के पास गए, परंतु शिव ने स्पष्ट कहा:
“तुम तीनों लोकों के पालनकर्ता, भगवान विष्णु की ही शरण लो।”
भगवान विष्णु ने देवताओं की विनती स्वीकार की और चंद्रवती नगरी पहुँचे। यहाँ भगवान विष्णु और मुर दैत्य के बीच भयंकर युद्ध हुआ जो: लगातार दस हजार वर्षों तक चला। भगवान विष्णु ने अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से पूरी असुर सेना का नाश कर दिया, लेकिन मुर दैत्य पर कहीं भी प्रभाव नहीं हुआ। लंबे युद्ध से थककर विष्णु हेमवती गुफा में विश्राम करने लगे।
जब मुर दैत्य विष्णु पर हमला करने गुफा में पहुँचा, उसी क्षण भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य तेजस्वी कन्या प्रकट हुई।
यह थीं –
भगवान विष्णु की योगमाया – देवी उत्पन्ना (एकादशी देवी)
उन्होंने तेजस्वी अस्त्रों से मुर दैत्य का संहार किया और उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। देवताओं ने प्रसन्न होकर कहा:
“जय देवी एकादशी!”
विष्णुजी जब निद्रा से जागे, उन्होंने देवी से पूछा, “हे देवी, आप कौन हैं?”
देवी ने उत्तर दिया-
“प्रभु, मैं आपकी योगमाया हूँ। आपके संरक्षण के लिए उत्पन्न हुई हूँ।”
विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए और वरदान देने लगे।
देवी ने कहा:
“जो मनुष्य मेरे नाम से व्रत करे, उसके सभी पाप नष्ट हों और उसे मोक्ष मिले।”
भगवान विष्णु ने कहा:
“देवी, तुम्हारा नाम एकादशी होगा और तुम्हारा व्रत संसार में सर्वोत्तम माना जाएगा।”
उत्पन्ना एकादशी केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का शक्तिशाली दिन है। यह वही तिथि है जब देवी एकादशी ने जन्म लेकर मुर दैत्य का वध किया और धर्म की स्थापना की। जो भी भक्त इस दिन विष्णु भक्ति में लीन होकर व्रत रखता है, उसके जीवन से अंधकार और नकारात्मकता सदा के लिए दूर हो जाती है।
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Disclaimer: इस आलेख में दी गई जानकारियां मान्यताओं पर आधारित हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।









