क्या केवल मन में भोग की कल्पना करना भी पाप है?
Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 6 कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन् |इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचार: स उच्यते || 6 || अर्थात […]
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Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 6 कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन् |इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचार: स उच्यते || 6 || अर्थात […]
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Bhagavad gita Chapter 3 Verse 5 न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् |कार्यते ह्यवश: कर्म सर्व: प्रकृतिजैर्गुणै: || 5 || अर्थात
क्या मनुष्य बिना कर्म के रह सकता है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 4 न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते |न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति || 4 || अर्थात भगवान कहते
क्या कर्म किए बिना निष्कर्मता और सिद्धि संभव है? Read Post »
सावन मास (Sawan 2025) भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन महीनों में से एक है। इस पूरे माह में श्रद्धालु
Sawan 2025 Start Date: कब है सावन का पहला सोमवार, जानें डेट और महत्व Read Post »
Bhagavad gita Chapter 3 Verse 3 श्रीभगवानुवाच |लोकेऽस्मिन्द्विविधा निष्ठा पुरा प्रोक्ता मयानघ |ज्ञानयोगेन साङ्ख्यानां कर्मयोगेन योगिनाम् || 3 || अर्थात
कौन सा मार्ग श्रेष्ठ है – ज्ञानयोग या कर्मयोग? Read Post »
Bhagavad gita Chapter 3 Verse 1 and 2 अर्जुन उवाच |ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन |तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव
अगर ज्ञान श्रेष्ठ है तो फिर कर्म क्यों करें? Read Post »
आषाढ़ अमावस्या हिंदू धर्म में पितृ तर्पण और नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए एक अत्यंत पवित्र तिथि मानी
Ashadha Amavasya Vrat Katha 2025: पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त Read Post »
सोम प्रदोष व्रत हिंदू धर्म के सबसे पवित्र व्रतों में से एक है, जो भगवान शिव और माता पार्वती को
Som Pradosh Vrat Katha 2025: पूजा विधि और महत्व Read Post »
Bhagavad gita Chapter 2 Verse 72 एषा ब्राह्मी स्थिति: पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति |स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति || 72 || अर्थात भगवान
क्या अंतिम समय में भी शांति पाई जा सकती है? Read Post »
Bhagavad gita Chapter 2 Verse 71 विहाय कामान्य: सर्वान्पुमांश्चरति नि:स्पृह: |निर्ममो निरहङ्कार: स शान्तिमधिगच्छति || 71 || अर्थात भगवान कहते
निर्मम निरहंकारी और नि:स्पृह व्यक्ति ही क्यों पाता है शांति? Read Post »
Bhagavad gita Chapter 2 Verse 70 आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठंसमुद्रमाप: प्रविशन्ति यद्वत् |तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वेस शान्तिमाप्नोति न कामकामी ॥ ७०॥ अर्थात भगवान
समुद्र जैसा संयम कैसे लाएं जीवन में? भगवद गीता से सीख Read Post »
Yogini Ekadashi 2025 हर एकादशी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है, लेकिन योगिनी एकादशी को पाप नाशिनी और
Yogini ekadashi vrat ki katha in hindi – जानिए इस व्रत की रहस्यमयी पौराणिक कथा और महत्व Read Post »