Bhagavad Gita

Chanakya Neeti for Success

Chanakya Neeti for Success : जीवन बदलने वाली 10 महत्वपूर्ण सीखें

Chanakya Neeti for Success : जीवन बदलने वाली 10 महत्वपूर्ण सीखें भारतीय इतिहास में चाणक्य-जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम […]

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 4

क्या आसक्ति-मुक्त जीवन ही सच्चे योग की पहचान है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 4 यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते । सर्वसंकल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते ॥४॥ अर्थात भगवान कहते हैं, जिस

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 3

Bhagavad Gita – क्या निष्काम कर्म से ही योग मिलता है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 3 आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते । योगारूढस्य तस्यैव ‘शमः कारणमुच्यते ॥३॥ जो ध्यान करने वाला योगी

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 2

क्या हर रोज़ के तनाव से मुक्त होने का तरीका सिर्फ़ ‘आसक्ति त्याग’ है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 2 यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पाण्डव । न ह्यसंन्यस्तसंकल्पो योगी भवति कश्चन ॥२॥ हे

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Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 1

क्या कर्म करते हुए अनासक्त रहना ही संन्यास कहलाता है?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 1 श्रीभगवानुवाचअनाश्रितः कर्मफलं कार्य कर्म करोति यः । स संन्यासी च योगी च न निरग्निर्न

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 29

गीता बताती है-ईश्वर ही मित्र रक्षक और हितैषी हैं-क्या हम मानते हैं?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 29 भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् ।सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥२९॥ भक्त मुझे समस्त यज्ञों और

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 27 28

Bhagavad Gita – क्या इच्छा भय और क्रोध से मुक्त होकर ही मिलता है सच्चा मोक्ष?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 27 28 स्पर्शान्कृत्वा बहिर्बाह्यांश्चक्षुश्चैवान्तरे भुवोः । प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ ॥२७॥यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 26

मन पर विजय पाकर ब्रह्मनिर्वाण कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 26 कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् । अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् ॥२६॥ जो सांख्य योगी वासना से

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 25

कैसे समाप्त होते हैं हमारे राग-द्वेष और संशय? गीता देती है उत्तर

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 25 लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥२५॥ जिनके शरीर, मन, बुद्धि और इन्द्रियाँ

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 24

Bhagavad Gita का रहस्य – क्या सच्चा सुख बाहर नहीं हमारे भीतर ही छिपा है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 24 योऽन्तः सुखोऽन्तरारामस्तथान्तज्र्योतिरेव यः ।स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ॥२४॥ जो व्यक्ति परमात्मा में ही प्रसन्न

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 23

भगवद् गीता में क्यों कहा गया है कि जो काम-क्रोध को सहन करता है वही योगी है?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 23 ‘शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् । कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः ॥२३॥ जो

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Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 22

Bhagavad Gita- क्या हर आनंद के पीछे छिपा है दुख का बीज?

Bhagavad Gita Chapter 5 Verse 22 ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते। आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ॥२२॥

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