बर्बरीक जी कौन थे? खाटू श्याम जी के रहस्यमयी रूप की कथा
जब भी भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का उल्लेख होता है, तो कई दिव्य पात्रों की कहानियाँ सामने आती हैं। इन्हीं […]
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जब भी भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का उल्लेख होता है, तो कई दिव्य पात्रों की कहानियाँ सामने आती हैं। इन्हीं […]
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Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 32 यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम् । सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् ॥ ३२॥ अर्थात भगवान कहते
क्यों भगवान ने युद्ध को स्वर्ग का द्वार कहा? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 31 स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि |धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते || 31 || अर्थात भगवान कहते
स्वधर्म निभाना क्यों है जीवन का सबसे बडा कर्तव्य? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 30 देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत |तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि || 30 || अर्थात
श्रीकृष्ण ने अर्जुन से शोक न करने को क्यों कहा? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 29 आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेनमाश्चर्यवद्वदति तथैव चान्य: |आश्चर्यवच्चैनमन्य: शृ्णोतिश्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् || 29 || अर्थात
क्या आपने कभी अपने ‘स्वरूप’ को स्वयं जाना है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 28 अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत |अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना || 28 || अर्थात भगवान कहते
क्या मृत्यु सच में अंत है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 27 जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च |तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि || 27 ||
क्या हम जन्म और मृत्यु को टाल सकते हैं? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 25 26 अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते |तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि || 25 ||अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम्
क्या बीज की तरह हर पल बदलता है हमारा शरीर? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 24 अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च |नित्य: सर्वगत: स्थाणुरचलोऽयं सनातन: || 24 || अर्थात भगवान कहते हैं,
क्या आत्मा पर मंत्र शस्त्र या शाप का असर होता है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 23 नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: |न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत: || 23
शरीर नाशवान है आत्मा नहीं – क्या है इसका आध्यात्मिक विज्ञान? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 22 वासांसि जीर्णानि यथा विहायनवानि गृह्णाति नरोऽपराणि |तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही ||
क्या मृत्यु केवल पुराने वस्त्र बदलने जैसा ही एक परिवर्तन है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 21 वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम् |कथं स पुरुष: पार्थ कं घातयति हन्ति कम् || 21
क्या मृत्यु पर शोक करना उचित है? गीता क्या कहती है? Read Post »