महाभारत के वास्तविक स्थल जिन्हें आप आज भी देख सकते हैं।
प्राचीन भारत के सबसे महान महाकाव्यों में से एक महाभारत केवल युद्ध, धार्मिकता और ईश्वरीय मार्गदर्शन की कहानी नहीं है […]
महाभारत के वास्तविक स्थल जिन्हें आप आज भी देख सकते हैं। Read Post »
प्राचीन भारत के सबसे महान महाकाव्यों में से एक महाभारत केवल युद्ध, धार्मिकता और ईश्वरीय मार्गदर्शन की कहानी नहीं है […]
महाभारत के वास्तविक स्थल जिन्हें आप आज भी देख सकते हैं। Read Post »
Bhagavad gita Chapter 2 Verse 44 भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम् |व्यवसायात्मिका बुद्धि: समाधौ न विधीयते || 44 || अर्थात भगवान कहते हैं,
क्या भोग और ऐश्वर्य ईश्वर से दूर कर देते हैं? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 42 43 यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चित: |वेदवादरता: पार्थ नान्यदस्तीति वादिन: || 42 ||कामात्मान: स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम्
क्या सुख की तलाश आत्मज्ञान से दूर कर देती है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 41 व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन |बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम् || 41 || अर्थात भगवान कहते हैं, हे
क्या हमारे फोकस की कमी है बहुशाखा बुद्धि का परिणाम? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 40 नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते |स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् || 40 || अर्थात भगवान
क्या थोड़ी सी समता भी जन्म-मरण से मुक्ति दे सकती है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 39 एषा तेऽभिहिता साङ्ख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु |बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि || 39
भगवद गीता में ‘समबुद्धि’ का रहस्य क्या है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 38 सुखदु:खे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ |ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि || 38 || अर्थात
क्या सुख-दुख लाभ-हानि और जय-पराजय में समभाव ही सच्चा धर्म है? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 37 हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् |तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय: || 37
भगवद गीता हमें क्या सिखाती है कर्तव्य के बारे में? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 35 36 भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथा: |येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् || 35
भगवान कृष्ण ने अर्जुन को अपमान से क्यों डराया? Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 33 34 अथ चेतत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि |तत: स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि ||
क्या अपकीर्ति मृत्यु से भी अधिक कष्टदायक है? गीता से जानें उत्तर Read Post »
जब भी भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का उल्लेख होता है, तो कई दिव्य पात्रों की कहानियाँ सामने आती हैं। इन्हीं
बर्बरीक जी कौन थे? खाटू श्याम जी के रहस्यमयी रूप की कथा Read Post »
Bhagavad Gita Chapter 2 Shloka 32 यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम् । सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् ॥ ३२॥ अर्थात भगवान कहते
क्यों भगवान ने युद्ध को स्वर्ग का द्वार कहा? Read Post »