कैसे ब्रह्माजी के नियम से मिलता है जीवन का उद्देश्य?
Bhagavad Gita Chapter 3 Shloka 10 11 सहयज्ञा: प्रजा: सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापति: |अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक् || 10 ||देवान्भावयतानेन ते देवा […]
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