Author name: Kajal Makwana

नमस्कार दर्शकों मित्रो मेरा नाम Kajal Makwana है, में एक ब्लॉगर और यूट्यूबर हूं, तथा में आध्यात्मिकता (Spirituality) की श्रेणी में कंटेंट लिखती हूं और यूट्यूब पर विडियोज भी बनाती हूं। मुझे सनातन धर्म के बारे में जानना, आध्यात्मिकता को गहराई से समझना और हमारे हिन्दू धर्म के शास्त्रों जैसे रामायण, महाभारत, श्रीमद भगवद गीता, पुराण, तथा वेदों को पढ़ना बहुत पसंद है। मेरा लक्ष्य है कि मेरे लेखों और वीडियो के माध्यम से आपको (दर्शकों) सच्ची आध्यात्मिकता का अनुभव करा सकू, और हम सब के मन में ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत हो ऐसा कुछ कर सकू, तथा आध्यात्मिकता बढ़ने से समाज में शायद बुरे कर्म करने वाले कुछ समझे सके! और आने वाली पीढ़ी भी सनातन धर्म को गहराई से समझ सके। Follow me on: YouTube

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 57

क्या हमारे सुख-दुख की प्रतिक्रियाएं हमें अस्थिर बनाती हैं? गीता से जानें समाधान

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 57 य: सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् |नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता || 57 || अर्थात भगवान […]

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Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 56

क्या आप दुःख में भी शांत रह सकते हैं? गीता बताती है कैसे!

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 56 दु:खेष्वनुद्विग्नमना: सुखेषु विगतस्पृह: |वीतरागभयक्रोध: स्थितधीर्मुनिरुच्यते || 56 || अर्थात श्री भगवान बोले, ध्यान करने

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Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 55

क्या इच्छाओं का त्याग ही स्थिर बुद्धि की पहचान है?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 55 श्रीभगवानुवाच |प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् |आत्मन्येवात्मना तुष्ट: स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते || 55 || अर्थात श्री भगवान

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Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 54

क्या आप स्थितप्रज्ञ हैं? जानिए भगवद गीता से स्थिर बुद्धि के लक्षण

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 54 अर्जुन उवाच |स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव |स्थितधी: किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम् ||

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क्या योग का अर्थ है मतभेदों से ऊपर उठना?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 53 श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला |समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि || 53 || अर्थात भगवान कहते

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Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 52

रिश्तों और चाहतों से मुक्त होकर क्या मिल सकती है सच्ची शांति?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 52 यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति |तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च || 52 || अर्थात

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Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 51

जन्म-मरण के बंधन से कैसे मुक्त हों?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 51 कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिण: |जन्मबन्धविनिर्मुक्ता: पदं गच्छन्त्यनामयम् || 51 || अर्थात भगवान

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Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 50

क्या समता ही कर्म-कुशलता है? गीता श्लोक 2/50 का महत्व

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 50 बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते | तस्माद्योगाय युज्यस्व योग: कर्मसु कौशलम् || 50 || अर्थात भगवान

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Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 49

आज के व्यस्त जीवन में समता का अभ्यास कैसे करें?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 49 दूरेण ह्यवरं कर्म बुद्धियोगाद्धनञ्जय |बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणा: फलहेतव: || 49 || अर्थात भगवान कहते

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Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 48

कर्म करते हुए कैसे पाएं शांति और समता?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 48 योगस्थ: कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय |सिद्ध्यसिद्ध्यो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते || 48

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Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 47

कर्मण्येवाधिकारस्ते: क्या फल की इच्छा छोड़ना ही मोक्ष है?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 47 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन |मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि || 47 || अर्थात भगवान अर्जुन

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Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 46

कैसे बनें जीवन में संतुलित और तनावमुक्त?

Bhagavad gita Chapter 2 Verse 46 यावानर्थ उदपाने सर्वत: सम्प्लुतोदके |तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानत: || 46 || अर्थात भगवान कहते

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